पर्यावरण संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सार्थक पहल: जलवायु परिवर्तन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विषय पर संगोष्ठी

देहरादून11मार्च 2025(आरएनएस ) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वाडिया इंस्टीट्यूट में “जलवायु परिवर्तन एवं नवीकरणीय ऊर्जा – चुनौतियाँ और समाधान” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में भाग लिया। इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को समझना और इसके समाधान के लिए जागरूकता फैलाना था।

मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर समस्या बन चुका है। उन्होंने पिछले वर्ष की गर्मी को याद करते हुए कहा कि देहरादून और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान में जो वृद्धि देखी गई, वह इसके भयावह प्रभाव का एक संकेत है। इस समस्या के प्रति जागरूकता फैलाना और सार्थक चर्चा करना समय की आवश्यकता है।

संगोष्ठी में मुख्यमंत्री ने “हरियाली मिशन” के अंतर्गत राज्य में लाखों पौधों के रोपण की जानकारी भी साझा की। इसके अलावा, “जल शक्ति अभियान” के तहत 1000 गाँवों में तालाबों और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन ऑथोरिटी का गठन भी किया गया है, जो जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। अब तक 5500 जलीय स्त्रोतों और 292 सहायक नदियों का चिन्हीकरण कर उनका उपचार किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि वाडिया इंस्टीट्यूट के सहयोग से स्थापित ग्लेशियर अध्ययन केंद्र भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे हम प्राकृतिक संकेतों को समझते हुए उनके क्षरण को रोकने के लिए प्रभावी नीतियाँ विकसित कर सकते हैं।

उन्होंने इस मौके पर 38वें राष्ट्रीय खेलों के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन “ग्रीन-गेम्स” की थीम पर किया गया। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए रूद्राक्ष के पौधों का रोपण करने का भी उल्लेख किया। साथ ही, उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जो जीडीपी के साथ साथ ग्रोस इनवायरमेंट प्रोडक्ट (जीईपी) का इंडेक्स तैयार कर रहा है, जिससे जल, वन, भूमि और पर्वतों के पर्यावरणीय योगदान का आंकलन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जीवाश्म ईंधनों के स्थान पर ग्रीन ऊर्जा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। “नई सौर ऊर्जा नीति” के तहत 2027 तक 1400 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य है। इसके अंतर्गत “पी.एम. सूर्यघर योजना” और “मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना” के माध्यम से लोग सोलर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं।

इस संगोष्ठी में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने वन संपदाओं के संरक्षण के लिए स्थानीय लोगों को वनों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि वनों में आग लगने की घटनाओं को कम करने के लिए विस्तृत योजना बनाई जा रही है।

इस अवसर पर लोक गायक  नरेंद्र सिंह नेगी, यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, निदेशक वाडिया डा. विनीत कुमार गहलोत, वैज्ञानिक डॉ. जे. बी. सिंह, डॉ. हृदया चौहान सहित विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिक और अन्य दर्शक उपस्थित रहे।

यह संगोष्ठी जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए समझदारी से किए गए प्रयासों का प्रतीक है, जो हमारे पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को रेखांकित करता है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई पहलों से यह स्पष्ट है कि उत्तराखंड अपने पर्यावरण की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्पित है।

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