एमआईटी-डब्ल्यूपीयू ने वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025 का सफल समापन किया

देहरादून – एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT-WPU) ने वर्ल्ड टेक्नोलॉजी (WT) ग्रुप के सहयोग से वर्ल्ड टेक्नोलॉजी समिट 2025 इंडिया (WTS25) का सफल आयोजन पुणे स्थित वर्ल्ड पीस डोम में किया। इस दो दिवसीय वैश्विक सम्मेलन में 25 देशों के 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य तकनीक, विज्ञान और नवाचार के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजते हुए एक अधिक जुड़ा हुआ और सतत भविष्य बनाना था।

सम्मेलन के दौरान, प्रतिभागियों ने एआई, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलॉजी, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में हो रही प्रगति पर चर्चा की। यह चर्चाएँ चार वैज्ञानिक क्षेत्रों — डेटा साइंसेज, अर्थ साइंसेज, लाइफ साइंसेज और इंडस्ट्रियल साइंसेज — के अंतर्संबंध पर आधारित थीं।

सम्मेलन की कोऑर्डिनेशन कमीशन की चेयर, डेबोरा पंडित-सवाफ ने कहा, “वर्ल्ड पीस डोम के नीचे खड़े होकर बोलना मेरे लिए अत्यंत सम्मान की बात है — यह वह स्थान है जहां बुद्धि, विज्ञान और दर्शन एक साथ आते हैं।”

इसरो (IISU) के पूर्व निदेशक माधव वासुदेव ढेकणे ने अपने कीनोट भाषण में भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पर प्रकाश डाला, “1975 से 1980 के बीच के प्रारंभिक सैटेलाइट मिशनों से लेकर, जिन्होंने भारत के सबसे सुदूर गाँवों तक शैक्षणिक टेलीविज़न पहुँचाया, से लेकर 2008 के चंद्रयान, मंगलयान और सूर्य अध्ययन हेतु आदित्य-एल1 जैसे अभियानों तक — भारत ने असाधारण वैज्ञानिक दृष्टि और सहयोग का परिचय दिया है।”

एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के एक्जीक्यूटिव प्रेसिडेंट डॉ. राहुल वी. कराड ने तकनीक और मानव मूल्यों के बीच संतुलन के महत्व पर जोर देते हुए कहा, “पिछले सौ वर्षों में मानव ने बेहतर विचारों और समाधानों का निर्माण किया है — लेकिन अंततः यह इस पर निर्भर करता है कि हम उनका उपयोग मानवता के हित में कैसे करते हैं।”

सम्मेलन का समापन एक संयुक्त आह्वान के साथ हुआ — कि विज्ञान और तकनीक को मानवता के हित में एक सकारात्मक शक्ति के रूप में प्रयोग किया जाए, ताकि नवाचार वैश्विक कनेक्टिविटी को तेज करे और पूरी मानव जाति के लिए अवसरों का सृजन करे।

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