
देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित किए जाने की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन लगातार गति पकड़ता जा रहा है। स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति के तत्वावधान में 8 मार्च से शुरू हुआ क्रमिक अनशन शुक्रवार को 97वें दिन में प्रवेश कर गया।आंदोलनकारियों ने सरकार से गैरसैंण को शीघ्र स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग दोहराते हुए कहा कि अब और प्रतीक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी।
शुक्रवार को क्रमिक अनशन पर सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश शर्मा तथा उत्तराखंड शासन के पूर्व सचिव आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी बैठे।हालांकी विनोद प्रसाद रतूड़ी देहरादून के एकता विहार में स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर लगातार धरने पर बैठे है। वह विभिन्न संगठनों और समर्थकों के साथ मिलकर यहां क्रमिक अनशन व विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य निर्माण आंदोलन के मूल सपनों को साकार करने के लिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाना आवश्यक है। उनका तर्क है कि पहाड़ और मैदान के बीच संतुलित विकास, प्रशासनिक पहुंच और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए गैरसैंण सबसे उपयुक्त विकल्प है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखंड गठन के 25 वर्ष बाद भी स्थायी राजधानी का मुद्दा अधूरा है। राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान गैरसैंण को राजधानी बनाने की जो अपेक्षाएं जनता ने की थीं, उन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया। समिति का कहना है कि “एक राज्य, एक राजधानी” की भावना के अनुरूप सरकार को जल्द निर्णय लेना चाहिए।
अनशनकारियों ने कहा कि गैरसैंण केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता, पहचान और जनभावनाओं का प्रतीक है। उन्होंने सरकार से मांग की कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित कर राज्य आंदोलन के शहीदों और आंदोलनकारियों की भावनाओं का सम्मान किया जाए।
स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। आंदोलनकारियों ने प्रदेशवासियों से भी इस जनअभियान में जुड़ने और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को मजबूती देने का आह्वान किया।
गौरतलब है कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति और जनचर्चा का प्रमुख विषय रही है। आंदोलनकारी इसे राज्य के संतुलित और समावेशी विकास के लिए आवश्यक कदम मानते हैं।

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