
लखनऊ (आरएनएस ): बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में 21 फरवरी को हिंदी प्रकोष्ठ द्वारा ‘राजभाषा से राष्ट्रभाषा की ओर’ विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मशती के उपलक्ष्य में एवं मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित की गई।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री, राज्यसभा सांसद एवं संसदीय राजभाषा समिति के संयोजक प्रो. दिनेश शर्मा उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.के. द्विवेदी ने की। संगोष्ठी में हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग के सभापति प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित, भारतीय हिंदी परिषद, प्रयागराज के सभापति प्रो. पवन अग्रवाल, कुलसचिव प्रो. यूवी किरण एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव सहित कई गणमान्य विद्वान शामिल हुए।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं बाबासाहेब अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया। मंच संचालन का दायित्व डॉ. लता बाजपेयी सिंह ने निभाया।पूर्व उपमुख्यमंत्री प्रो. दिनेश शर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा का विकास समकालीन समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने मातृभाषा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और एकता का माध्यम है। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं को पर्याप्त महत्व देते हुए हिंदी को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।कुलपति प्रो. एस.के. द्विवेदी ने कहा कि हिंदी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान और सांस्कृतिक धरोहर की प्रतीक है। उन्होंने विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की वकालत की ताकि तकनीकी शिक्षा में भी इसकी भागीदारी बढ़े।हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग के सभापति प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने हिंदी भाषा के औपचारिक स्वरूप में बदलाव की आवश्यकता जताई। उन्होंने राजभाषा के लिए स्वतंत्र मंत्रालय की स्थापना, भारतीय भाषा विश्वविद्यालय की स्थापना, भाषायी क्षेत्रों में शोध कार्य, अनुवाद प्राधिकरण एवं संविधान विद्यापीठ के माध्यम से भाषा के विस्तार पर जोर दिया।भारतीय हिंदी परिषद, प्रयागराज के सभापति प्रो. पवन अग्रवाल ने कहा कि हिंदी ने क्षेत्रीय भाषाओं के आधार पर राज्यों के विभाजन के बावजूद अपनी राष्ट्रीय पहचान बनाई है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में हिंदी भाषा के महत्व और हिंदी के माध्यम से प्राप्त राजस्व पर भी चर्चा की।कुलसचिव प्रो. यूवी किरण ने हिंदी भाषा के वैश्विक महत्व और इसके विकास से जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी के दौरान 18 फरवरी को आयोजित निबंध एवं काव्य पाठ प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया और ‘विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी ओलंपियाड 2025’ विवरणिका का लोकार्पण किया गया।संगोष्ठी में केंद्रीय अकादमिक सत्र की अध्यक्षता भाषा एवं साहित्य विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष प्रो. रामपाल ने की। मुख्य वक्ता के रूप में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु के कला संकायाध्यक्ष प्रो. हरीश शर्मा, विशिष्ट वक्ता के रूप में आर.बी.एस. विद्यालय, आगरा के प्राचार्य प्रो. विजय श्रीवास्तव, राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद शर्मा, जनेस्बामा, बाराबंकी के हिंदी विभाग के अनिल कुमार विश्वकर्मा एवं बीबीएयू के हिंदी विभाग की डॉ. प्रीति राय ने विचार प्रस्तुत किए।समापन सत्र में शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के सदस्य प्रो. राज नारायण शुक्ल मुख्य अतिथि रहे। प्रो. राजशरण शाही ने हिंदी के शैक्षिक आयामों, प्रो. विजय कुमार वर्मा ने क्षेत्रीय भाषाओं, और डॉ. सुभाष मिश्रा ने भाषाओं के आधार पर भारत के कृत्रिम विभाजन पर चर्चा की।इस आयोजन में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. नरेंद्र कुमार, आइक्यूएसी निदेशक प्रो. राम चंद्रा, विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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