चेयरमैन डॉ. घनशाला ने छात्रों को दिया परिश्रम का मंत्र
देहरादून। ग्राफिक एरा मेडिकल कॉलेज के नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत एक विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम के साथ हुई। इस अवसर पर संस्थान समूह के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नए एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता और खुशियाँ केवल कठिन परिश्रम से ही प्राप्त होती हैं।
डॉ. घनशाला ने छात्रों को समझाया कि उनकी शिक्षा में न केवल आर्थिक निवेश है, बल्कि उनके माता-पिता के सपनों और आकांक्षाओं की पूंजी भी लगी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक पीढ़ी की मेहनत अगली पीढ़ी के भविष्य का निर्माण करती है और यही प्रयास उन्हें सफल बनाकर राष्ट्र का गौरव बना सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जीवन में संघर्ष कभी समाप्त नहीं होते और परिश्रम का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
चेयरमैन ने संस्थान के सफर – एक छोटे से प्रयास से लेकर आज दो विश्वविद्यालयों, पाँच परिसरों और 900 बिस्तरों वाले अस्पताल तक के विकास की प्रेरक कहानी साझा की। वर्ष 2017 से 2023 तक की उपलब्धियों को चित्रों के माध्यम से दिखाते हुए उन्होंने छात्रों को चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा दी। साथ ही, उन्होंने नियमित उपस्थिति, अनुशासन बनाए रखने, सड़क सुरक्षा, नशीले पदार्थों और अनुचित साइबर गतिविधियों से दूर रहने की सलाह दी।

कार्यक्रम के दौरान ग्राफिक एरा अस्पताल के निदेशक डॉ. पुनीत त्यागी ने छात्रों को अस्पताल की उन्नत तकनीकी सुविधाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि बिना सर्जरी के हृदय का वाल्व बदलने (TAVI) की अत्याधुनिक तकनीक में यह अस्पताल न केवल राज्य में अग्रणी है, बल्कि इसे उत्तर भारत के एक प्रमुख TAVI केंद्र के रूप में भी मान्यता प्राप्त हुई है। देश के जाने-माने विशेषज्ञ चिकित्सक भी यहाँ सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। डॉ. त्यागी ने चिकित्सा शिक्षा की तुलना एक ‘आग का दरिया’ से करते हुए इसमें पूर्ण निमग्नता और कड़ी मेहनत की आवश्यकता पर बल दिया।
यह ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के एमबीबीएस पाठ्यक्रम के दूसरे बैच का स्वागत समारोह था। इस अवसर पर डीन डॉ. एस.एल. जेठानी, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. गुरदीप सिंह झीते तथा विभिन्न विभागों के अध्यक्ष एवं फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संचालक आदित्य अग्निहोत्री ने डॉ. घनशाला के जीवन संघर्ष और उनकी सामाजिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। नए छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण कर संस्थान की बुनियादी सुविधाओं को भी देखा और समझा।

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