निरंकारी मिशन ने मनाया मुक्ति पर्व, आंतरिक स्वतंत्रता का दिया संदेश

मन के बंधनों से आजादी ही वास्तविक मुक्ति – सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज

देहरादून। संपूर्ण भारतवर्ष जहां स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रभक्ति, गौरव और उल्लास के साथ मना रहा था, वहीं संत निरंकारी मिशन ने इस अवसर पर ब्रह्मज्ञान द्वारा प्रदत्त आंतरिक स्वतंत्रता के दिव्य संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाया। मुक्ति पर्व के पावन अवसर पर संत निरंकारी मंडल के तत्वावधान में हरिद्वार बाईपास रोड स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन देहरादून में विशेष सत्संग का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में एनसीआर दिल्ली से पधारे सुरजीत सिंह नशीला जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज का पावन संदेश सुनाया। उन्होंने कहा कि सच्ची मुक्ति बाहरी बंधनों से नहीं, बल्कि नफरत, अहंकार, छोटी सोच और पूर्वाग्रहों से मुक्त होने में है तथा हर सांस में निराकार का एहसास रखते हुए प्रेम, भक्ति और स्वीकार्यता से जीना ही जीते-जी मुक्ति है। सतगुरु माता जी के संदेश में माता सविंदर जी के जीवन से प्रेरणा लेते हुए लाइट हाउस का उदाहरण दिया गया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, भीतर की शांति, प्रेम और सकारात्मकता की रोशनी सदैव कायम रखनी चाहिए। संतों की शिक्षाओं को केवल सुनना नहीं, बल्कि विचार, कर्म और जीवन में उतारना ही वास्तविक साधना और मुक्ति का मार्ग बताया गया।

इस अवसर पर श्रद्धालु भक्तों ने उन महान संत विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए श्रद्धा-सुमन अर्पित किए, जिनके त्याग एवं समर्पण ने मानवता को मुक्तिमार्ग की ओर अग्रसर किया। साथ ही विश्वभर में मिशन की विभिन्न शाखाओं में भी मुक्ति पर्व के अवसर पर विशेष सत्संग आयोजित कर इन संत विभूतियों को स्मरण किया गया।

उल्लेखनीय है कि मुक्ति पर्व का आरंभ वर्ष 1964 में जगत माता बुद्धवंती जी की पावन स्मृति में हुआ था। वर्ष 1969 में शहनशाह बाबा अवतार सिंह जी के ब्रह्मलीन होने के बाद यह दिवस शहनशाह-जगतमाता दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। वर्ष 1979 में संत लाभ सिंह जी की स्मृति को भी इस दिवस से जोड़ते हुए बाबा गुरबचन सिंह जी ने इसे मुक्ति पर्व के रूप में स्थापित किया। वर्ष 2018 से युगनिर्माता माता सविंदर जी को भी इस पावन अवसर पर श्रद्धापूर्वक नमन किया जाता है।

कार्यक्रम में मसूरी जोन के जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह जी ने संत निरंकारी सत्संग भवन में आए श्रद्धालु भक्तों का स्वागत व आभार प्रकट किया। आयोजकों ने कहा कि जैसे भौतिक स्वतंत्रता राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करती है, वैसे ही ब्रह्मज्ञान की दिव्य ज्योति मानव को प्रेम एवं सद्भाव के पावन मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करती है।

Static 1 Static 1
ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments