

देहरादून। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की माँग अब हिंसक और ऐतिहासिक मोड़ पर आ खड़ी हुई है। गैरसैंण स्थायी राजधानी समिति ने साफ कहा है कि सरकार की “वादाखिलाफी और हठधर्मिता” अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समिति ने 13 अगस्त 2026 को देहरादून विधानसभा के बाहर प्रातः 9 बजे सामूहिक मुंडन और 15 अगस्त 2026 को प्रातः 9:30 बजे विधानसभा से गैरसैंण तक महा-पदयात्रा का शंखनाद कर दिया है।
दिल्ली, कर्णप्रयाग, चौखुटिया और रुद्रप्रयाग में पहले ही उग्र प्रदर्शन हो चुके हैं, जबकि देहरादून धरना स्थल पर 100 दिनों से अधिक का क्रमिक अनशन इस बात का जीता-जागता सबूत है कि यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं। समिति के मुख्य संयोजक पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी, पत्रकारिता छात्रा पार्थ रतूड़ी, गोपाल दत्त कुमेड़ी, सुधीर गैरोला और शैलेंद्र शेखर करगेती ने एक स्वर में कहा, “जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं किया जाता, न हम बैठेंगे, न सरकार को चैन से बैठने देंगे।”
उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार को अगर लगता है कि समय टालकर आंदोलन को थकाया जा सकता है, तो यह “ऐतिहासिक भूल” होगी। समिति ने ‘प्रण से प्राण तक’ का संकल्प लिया है और अब जंग “सीधी और आर-पार” की होगी।

इसी कड़ी में 13 अगस्त को सुबह 9 बजे विधानसभा परिसर में सरकार के खिलाफ रोष और गैरसैंण के प्रति निष्ठा के प्रतीक के रूप में सामूहिक मुंडन किया जाएगा। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को 9:30 बजे विधानसभा के बाहर से देहरादून-गैरसैंण महा-पदयात्रा का आगाज होगा, जो उत्तराखंड के इतिहास की सबसे बड़ी यात्राओं में से एक मानी जा रही है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यह सिर्फ राजधानी की लड़ाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड की “आत्मा और स्वाभिमान” की लड़ाई है। अब देखना यह है कि सरकार इस ऐतिहासिक आमने-सामने के संकट में क्या कदम उठाती है।

Recent Comments