देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के 79वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि BIS ने पिछले आठ दशकों में गुणवत्ता, विश्वसनीयता और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देकर ‘गुणवत्ता ही पहचान’ का मंत्र साकार किया है।
धामी ने बताया कि 1947 में भारतीय मानक संस्था के रूप में शुरू हुई BIS आज देश की औद्योगिक, वैज्ञानिक और आर्थिक प्रगति की मजबूत आधारशिला है। उन्होंने कहा कि BIS के मानकीकरण, प्रमाणीकरण और गुणवत्ता परीक्षण से उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया गया है, साथ ही उपभोक्ताओं में भरोसे और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है। आज मानकीकरण का दायरा उद्योग से परे कृषि, स्वास्थ्य, सड़क सुरक्षा, ऊर्जा, जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन और डिजिटल सेवाओं तक फैला है। BIS द्वारा डिजिटल सुरक्षा, मेडिकल डिवाइस, ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन, रिसाइकिल सामग्री और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में समयानुकूल मानक तय किए जा रहे हैं, जो भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
धामी ने कहा कि BIS सतत विकास के लक्ष्यों के अनुरूप इकोलॉजी और इकॉनमी के बीच संतुलन स्थापित कर रहा है। उत्तराखंड में BIS लोक निर्माण विभाग, आपदा प्रबंधन, एमडीडीए और यूपीसीएल जैसे विभागों के साथ समन्वय कर मानकीकरण जागरूकता बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियानों को BIS की भूमिका अहम है, जो भारतीय उत्पादों को वैश्विक गुणवत्ता मानदंड बनाने में मदद कर रही है।

राज्य सरकार स्थानीय उत्पादों जैसे हस्तशिल्प, जैविक कृषि, औषधीय जड़ी-बूटियाँ और खाद्य पदार्थों के लिए उच्च गुणवत्ता मानक स्थापित कर रही है। ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड राज्य के पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए बनाया गया है। धामी ने जोर दिया कि गुणवत्ता को आदत बनाना जरूरी है, ताकि यह एक जन आंदोलन बने। उन्होंने विश्वास जताया कि BIS ‘वन नेशन, वन स्टैंडर्ड’ नीति से भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
धामी ने राज्य में विज्ञान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया। पहली बार विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति 2025 लागू की गई है। सभी 13 जनपदों के 95 ब्लॉकों में 180 विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित आधारित प्रयोगशालाएं स्थापित हैं। जिलों में साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग से सैकड़ों छात्र लाभान्वित हो रहे हैं। प्रत्येक जनपद में ‘लैब-ऑन-व्हील्स’ चल रही है। विश्वविद्यालयों में 60 पेटेंट सूचना केंद्र बनाए गए हैं। सीमांत क्षेत्रों के लिए ‘सीमांत क्षेत्र विकास परिषद’ गठित की गई है। साइंस महोत्सव अब पर्वतीय जनपदों तक पहुंचे हैं, इस साल रुद्रप्रयाग में आयोजित। प्रत्येक जनपद में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार केंद्रों के लिए बजट आवंटित किया गया है। शीघ्र विज्ञान और नवाचार आधारित प्रसारण शुरू होंगे।

देहरादून में बन रही देश की पांचवीं साइंस सिटी का निर्माण 175 करोड़ रुपये की लागत से तेजी से चल रहा है। महिला प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। केन्द्रीय संस्थानों से विज्ञान संवाद को नई गति मिली है। सिलक्यारा अभियान में अपनाए गए विज्ञान-प्रौद्योगिकी आधारित रेस्क्यू मॉडल को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली है, जिस पर आधारित विश्व आपदा प्रबंधन सम्मेलन आयोजित हो रहा है। आज राज्य का हर कोना विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ा है।
कार्यक्रम में विधायक खजान दास, उमेश शर्मा काऊ, सविता कपूर, निदेशक भारतीय मानक ब्यूरो सौरभ तिवारी, महानिदेशक यू-कॉस्ट प्रो. दुर्गेश पंत, ब्रिगेडियर के.जी बहल और उद्योग एवं व्यापार संघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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