देहरादून । उत्तराखंड में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रहार के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य में संचालित 15 संदिग्ध म्यूल खातों पर कानूनी कार्यवाही की है, जबकि 80 से अधिक खातों का सत्यापन भी किया जा चुका है। STF की जांच में यह खुलासा हुआ है कि साइबर अपराधियों का एक संगठित गिरोह भोले-भाले लोगों को कमीशन, किराया, नौकरी और अन्य लालच देकर उनके बैंक खाते खरीदता था और बाद में उन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने, उसे इधर-उधर ट्रांसफर करने तथा छिपाने में करता था। इस पूरे प्रकरण में गिरोह के दो प्रमुख एजेंटों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जबकि अन्य संलिप्त व्यक्तियों की तलाश जारी है।
मुख्यमंत्री के अपराधमुक्त उत्तराखंड के संकल्प और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक STF अजय सिंह के नेतृत्व में साइबर अपराधियों के खिलाफ यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। STF के अंतर्गत 12 टीमें गठित की गई हैं, जो राज्यभर में बड़े पैमाने पर खुले म्यूल खातों की जांच और सत्यापन में जुटी हैं। जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों, बैंक अभिलेखों, मोबाइल नंबरों के तकनीकी विश्लेषण और NCRP तथा I4C पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर यह सामने आया कि कई बैंक खाते धोखाधड़ी से प्राप्त रकम को खपाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। एक प्रमुख खाते में ही करीब 1.53 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से संबंधित 28 शिकायतें मिलीं, जबकि अन्य खातों में भी लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन और बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज पाई गईं।
इसी आधार पर साइबर पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा अपराध संख्या 26/2026 धारा 318(4), 61(2) भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 66(D) आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। जांच में यह भी पता चला कि कुछ लोगों ने लालचवश अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल नंबर, सिम कार्ड और नेट बैंकिंग सुविधाएं अपराधियों को उपलब्ध कराईं। ऐसे लोगों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। STF ने स्पष्ट किया है कि म्यूल खाता उपलब्ध कराना या किसी अन्य के कहने पर अपने खाते से लेनदेन करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
इस कार्रवाई में जिन दो आरोपियों को चिन्हित कर हिरासत में लिया गया है, उनमें 29 वर्षीय दानिश अंसारी पुत्र नौशाद अंसारी, मूल निवासी मोहल्ला किला, निकट पानी की टंकी, देवबंद, उत्तर प्रदेश, हाल निवासी सिद्धार्थ विहार कॉलोनी, कंडोली, थाना रायपुर, देहरादून तथा 32 वर्षीय अंकित एन्थोनी पुत्र स्वर्गीय सुरेश एन्थोनी, निवासी राजीव नगर तरली कंडोली, राजपुर रोड, थाना रायपुर, देहरादून शामिल हैं। इनके कब्जे से दो मोबाइल फोन, उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की तीन पासबुक और फर्जी आईडी पर जारी चार सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।

STF ने बताया कि फिलहाल उसकी रडार पर उत्तराखंड में संचालित लगभग 2200 संदिग्ध म्यूल बैंक खाते हैं। इन खाताधारकों की पहचान, बैंक रिकॉर्ड की जांच, मोबाइल नंबरों के विश्लेषण और जमीनी सत्यापन का अभियान लगातार जारी है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में म्यूल अकाउंट के जरिए साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कई खातों में करोड़ों रुपये के लेनदेन सामने आए हैं। उन्होंने आम जनता से अपील की कि किसी भी लोकलुभावन ऑफर, फर्जी वेबसाइट, धनराशि दोगुनी करने के झांसे, टिकट बुकिंग के बहाने, ऑनलाइन फ्रेंचाइजी, सोशल मीडिया विज्ञापन और गूगल पर दिखने वाले कथित कस्टमर केयर नंबरों पर भरोसा न करें।
STF ने लोगों को सावधान करते हुए कहा है कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या नेट बैंकिंग विवरण किसी अनजान व्यक्ति को कभी न दें। बिना सत्यापन के किसी ऐप या व्यक्ति के साथ आधार, पैन या बैंक पासबुक की फोटो साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति आपके खाते में पैसा मंगवाकर उसे कहीं और ट्रांसफर करने या नकद निकालकर देने के बदले कमीशन देने की बात कर रहा है, तो यह साइबर अपराध का हिस्सा हो सकता है। खाते में संदिग्ध या अनजान धनराशि आने पर तुरंत बैंक और स्थानीय पुलिस को सूचना दें। साथ ही WhatsApp पर भेजे गए QR कोड स्कैन न करें, किसी अनजान नंबर पर भुगतान न करें, बुकिंग से पहले वेबसाइट का URL अवश्य जांचें और केवल आधिकारिक वेबसाइट का ही इस्तेमाल करें।
STF ने लोगों से यह भी अपील की है कि यदि उनके पास ऐसी कोई कॉल, मैसेज या ऑफर आए तो उसकी शिकायत अवश्य करें। साइबर और ऑनलाइन ठगी की शिकायत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा सरकार द्वारा संचार साथी वेबसाइट पर शुरू किए गए चक्षु पोर्टल का भी उपयोग किया जा सकता है। पुलिस का कहना है कि जागरूकता ही इस प्रकार के साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

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