“कर्नल कोठियाल के बयान ने सरकार के अधूरे और भ्रामक आंकड़ों की पोल खोल दी” – गणेश गोदियाल
देहरादून: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में आई धराली आपदा को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते ही, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने एक बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने घोषणा की है कि पार्टी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 4 दिसंबर, गुरुवार को धराली आपदाग्रस्त क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करेगा।
यह निर्णय राज्य सरकार में आपदा प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे कर्नल अजय कोठियाल के हालिया खुलासों के बाद लिया गया है। गोदियाल ने कहा कि कर्नल कोठियाल के बयान ने धामी सरकार की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़े अधूरे व भ्रामक हैं। साथ ही, राहत और पुनर्वास कार्यों में भारी लापरवाही बरती गई है।
गोदियाल ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में वह स्वयं शामिल रहेंगे। यह दल निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ धराली का दौरा करेगा:
- स्थानीय पीड़ित परिवारों से मिलकर वास्तविक स्थिति की प्रत्यक्ष जानकारी लेना।
- प्रशासनिक स्तर पर हो रही कथित अनदेखी का आंकलन करना।
- पिछले चार महीनों में सरकार और प्रशासन के दावों की सच्चाई की जांच करना।
धराली दौरे के बाद प्रतिनिधिमंडल एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा। इस रिपोर्ट को राज्य के महामहिम राज्यपाल एवं केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा। गोदियाल ने उम्मीद जताई कि राज्यपाल व केंद्र सरकार उत्तराखंड सरकार पर दबाव बनाएंगे, ताकि बिना विलंब प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन, पुनर्निर्माण और पुनर्वास के कार्य शुरू हो सकें।
गोदियाल ने आरोप लगाते हुए कहा, “जब मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि (कर्नल कोठियाल) ही सरकार की पोल खोल रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि सरकार ने जनता से जानकारी छुपाई है। धराली के लोग आज भी राहत और न्याय की प्रतीक्षा में हैं, लेकिन सरकार आंकड़ों और बैठकों में उलझी है।”
उन्होंने याद दिलाया कि आपदा के तत्काल बाद भी तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष करन महारा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल धराली गया था। अब नए खुलासों के मद्देनजर यह दूसरा दौरा किया जा रहा है।
गोदियाल ने स्पष्ट किया, “कांग्रेस इस मानवीय त्रासदी को राजनीति का विषय नहीं, बल्कि संवेदना और जिम्मेदारी का विषय मानती है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि धराली के पीड़ितों की आवाज सरकार तक पहुंचे और उचित मुआवजा, पुनर्वास एवं खोज अभियान तुरंत शुरू हों।”
उन्होंने 2013 की केदारनाथ आपदा का उदाहरण देते हुए कहा कि तत्कालीन कांग्रेस हाईकमान ने आपदा कार्यों में रुचि न दिखाने और ईमानदारी से काम न करने के आरोप में तत्कालीन मुख्यमंत्री को हटा दिया था। उनके अनुसार, वर्तमान केंद्र सरकार आपदाग्रस्त क्षेत्रों के प्रति उतनी गंभीर और संवेदनशील नहीं दिख रही।
आखिर में गोदियाल ने कहा, “कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा महज औपचारिकता नहीं है। यह सच को सामने लाने, पीड़ितों को न्याय दिलाने और सरकार की नाकामी को उजागर करने का एक संकल्प है, जो आपदा प्रभावित क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर प्रदेश के सामने लाएगा।”

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