नवंबर में प्रदोष व्रत: तिथि, महत्व और पूजा-विधि 

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। इस दिन महादेव की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और सुख-समृद्धि का आगमन होता है। प्रदोष व्रत प्रत्येक माह के शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। सूर्यास्त के बाद विशेष पूजा-अर्चना का विधान होता है और शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। इसके प्रभाव से भाग्य सुधारने के साथ-साथ रोग-तनाव जैसी समस्याओं में भी कमी आती है। वर्तमान में कार्तिक माह चल रहा है और इस माह का प्रदोष व्रत 3 नवंबर को रखा जाएगा। आइए इस दिन के शुभ योग और पूजा विधि को जानें।

प्रदोष व्रत की तिथि और समय

  • इस बार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 3 नवंबर को सुबह 5:07 मिनट से प्रारम्भ हो रही है।
  • तिथि का समापन 4 नवंबर को देर रात 2:05 मिनट पर होगा।
  • उदय तिथि के अनुसार, 3 नवंबर को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह कार्तिक माह का अंतिम तथा नवंबर का पहला प्रदोष व्रत है।

शुभ मुहूर्त

  • प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त शाम 5:34 मिनट से प्रारम्भ होकर रात 8:11 मिनट तक माना गया है।
  • अमृत चौघड़िया: शाम 4:12 बजे से 5:34 बजे तक।
  • चल चौघड़िया: शाम 5:34 बजे से 7:12 बजे तक।
  • गोधूलि मुहूर्त: 5:34 बजे से 6:00 बजे तक।

पूजा विधि

  1. पूजा के लिए चौकी पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं और महादेव संग शिव परिवार की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  2. शिवलिंग पर जल, शहद और दूध से अभिषेक करें। इसके बाद महादेव को चंदन लगाएं।
  3. पूरे शिव परिवार को फूलों की माला पहनाएं।
  4. पार्वती माता को सुहाग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है।
  5. शिव जी को बेलपत्र और शमी का फूल अर्पित करें।
  6. शुद्ध देसी घी से दीपक जलाएं और मिठाई का भोग लगाकर सुख-समृद्धि की कामना करें।
  7. अंत में महादेव की आरती करें और अपनी सामर्थ्य अनुसार साबुत अनाज जैसे गेहूं, चावल आदि का दान करें।

महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व:
ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ॥

सुख और शांति प्राप्त करने का मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।

प्रदोष व्रत ईमानदारी और भक्ति से करने पर शिव की कृपा प्राप्ति में सहायक माना जाता है। इस दिन की शुद्ध साधना, उपासना और जरूरतमंदों को दान देने से जीवन में शांति और समृद्धि आती है।

डिसक्लेमर :-
इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गांरंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संकलित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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