देहरादून, 01 फरवरी 2025(आरएनएस)राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) के समक्ष उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री ने राजभवन में ‘वन यूनिवर्सिटी-वन रिसर्च’ के तहत चल रहे शोध कार्य की प्रगति पर प्रस्तुतीकरण दिया। यह शोध “संस्कृति और भारतीय ज्ञान प्रणाली की पुनर्स्थापना: उत्तराखण्ड राज्य के संदर्भ में” विषय पर केंद्रित है।
प्रो. शास्त्री ने शोध के उद्देश्यों और प्रमुख निष्कर्षों की जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस अध्ययन में तीर्थाटन और पर्यटन के बीच के अंतर को स्पष्ट किया गया है, जिससे पवित्र तीर्थ स्थलों की शुचिता बनाए रखने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस विषय में अज्ञानता के कारण पर्यावरणीय, सामाजिक और प्राकृतिक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

उन्होंने शोध के दौरान पाया कि उत्तराखण्ड में पाँच प्रयाग (संगम) होने की आम धारणा के विपरीत, प्राचीन शास्त्रों में इससे अधिक प्रयागों का उल्लेख मिलता है। यदि इन प्रयागों का प्रचार-प्रसार किया जाए, तो राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मजबूती मिलेगी और तीर्थाटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।
राज्यपाल ने इस शोध कार्य के लिए विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं को शुभकामनाएँ दीं और इसे भारतीय प्राचीन ज्ञान प्रणाली और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सहायक बताया। उन्होंने निर्देश दिए कि इस शोध की संक्षिप्त रिपोर्ट तैयार की जाए, जिससे इसके निष्कर्षों को व्यापक स्तर पर प्रचारित किया जा सके।

इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव श्री रविनाथ रामन, अपर सचिव श्रीमती स्वाति एस. भदौरिया, तथा विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. दिनेश चन्द्र शास्त्री, शोध अन्वेषक डॉ. विनय सेठी और डॉ. उमेश शुक्ल उपस्थित रहे।

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