अंकिता भंडारी मामले में फिर तेज हुआ विरोध, सीबीआई दफ्तर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने जताया आक्रोश

देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच को लेकर लोगों का गुस्सा एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दिया। गुरुवार को देहरादून के सीमा द्वार स्थित सीबीआई कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए और जांच की रफ्तार पर नाराजगी जताई। तेज बारिश के बावजूद आंदोलनकारी डटे रहे और कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए जवाबदेही की मांग उठाई।

‘अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच’ से जुड़े कार्यकर्ता और महिलाएं सीबीआई कार्यालय पहुंचे, जहां पहले से पुलिस बल तैनात था। प्रदर्शन को रोकने के लिए मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग लगाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद आंदोलनकारियों ने पीछे हटने से इनकार कर दिया। विरोध के दौरान कुछ महिलाओं ने दूसरे प्रवेश मार्ग तक पहुंचकर सांकेतिक रूप से कार्यालय बंद करने की कोशिश की और इसे न्याय की मांग का प्रतीक बताया।

प्रदर्शन के दौरान संघर्ष मंच के प्रतिनिधियों की सीबीआई अधिकारियों के साथ बातचीत भी हुई। इस दौरान आंदोलनकारियों ने जांच की प्रगति को लेकर कई अहम सवाल उठाए। मंच से जुड़े लोगों का कहना था कि मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद काफी समय गुजर चुका है, लेकिन अब तक जांच किस चरण में है, इसकी साफ जानकारी सामने नहीं आई।

आंदोलनकारियों ने कहा कि मामले में शुरू से जिस कथित वीआईपी की चर्चा होती रही, उसकी पहचान अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या जांच एजेंसी ने उससे पूछताछ की है या नहीं। 

इसके अलावा, रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर भी सवाल उठे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घटना के बाद संभावित साक्ष्यों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई, लेकिन इस पहलू पर अब तक सख्त कानूनी कार्रवाई नजर नहीं आई।उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि जांच शुरू होने के इतने महीनों बाद भी अंकिता भंडारी के परिजनों को विस्तार से बातचीत या बयान के लिए क्यों नहीं बुलाया गया।

प्रदर्शन में शामिल महिला कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की नहीं रह गई है, बल्कि यह उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, व्यवस्था की पारदर्शिता और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता से भी जुड़ा मुद्दा बन चुका है। उनका कहना था कि जब तक पूरे मामले पर स्पष्ट और भरोसेमंद जवाब नहीं मिलते, आंदोलन जारी रहेगा।

प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जांच में ठोस प्रगति देखना चाहती है। गुरुवार का यह प्रदर्शन इसी बढ़ते असंतोष का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यदि जांच को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आती, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।

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