
लखनऊ 2 अप्रैल (आरएनएस )। देश में बेरोजगारी, महंगाई और बुनियादी मुद्दों पर चर्चा के बजाय धार्मिक भावनाओं को भडक़ाने और इतिहास को छेडऩे की प्रवृत्ति पर राष्ट्रीय किसान मंच ने कड़ा एतराज जताया है। मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा कि आज कोई भी राजनीतिक दल इससे अछूता नहीं है, जबकि असली मुद्दे पीछे छूट गए हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए सवाल किया कि क्या इससे देश और आने वाली पीढिय़ों का भला होगा?प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम में दीक्षित ने कहा कि हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, लेकिन गांव और किसान आज भी अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों में ग्रामीण विकास और किसानों की खुशहाली के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इससे अलग है। जब तक गांवों का वास्तविक विकास नहीं होगा और किसान खुशहाल नहीं होंगे, तब तक देश का संपूर्ण विकास संभव नहीं है।उन्होंने घोषणा की कि राष्ट्रीय किसान मंच गांव-गांव पदयात्रा निकालेगा, ताकि किसानों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सके और उनके समाधान के लिए संघर्ष किया जा सके। यह यात्रा ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के बीच जागरूकता फैलाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए की जाएगी।इसके अलावा, राष्ट्रीय किसान मंच अब शहरी वार्डों में भी सदस्यता अभियान शुरू करेगा, जिससे किसानों के मुद्दों को शहरी क्षेत्रों में भी प्राथमिकता दी जा सके। इस अवसर पर आम आदमी पार्टी के कई पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय किसान मंच की सदस्यता ग्रहण की, जिनका राष्ट्रीय अध्यक्ष ने स्वागत किया।मंच के प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार बाबा ने कहा कि संगठन के विचारों और उद्देश्यों को लेकर लोगों में तेजी से आकर्षण बढ़ रहा है, खासकर वे लोग जो किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हैं। कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष शहन शाह हुसैन, राजेश कुमार पाण्डेय, जिला सचिव अनुराग मेहरोत्रा, सुबोध अवस्थी, अभिषेक मिश्रा, निजामुद्दीन, सलमान, मनीष, मासूम अली, अमानत अली, विपिन साहू, किसन लाल, नीरज, मसूदुर रहमान, नजिश फातिमा और फरजाना सिद्दीकी समेत कई लोगों ने राष्ट्रीय किसान मंच की सदस्यता ग्रहण की।

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