देहरादून। उत्तराखंड में पिछले 19 दिनों से विकास कार्यों की रफ्तार पर लगी लगाम अब हट गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल को राज्यहित में स्थगित करने का बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री आवास में शुक्रवार को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसके बाद महासंघ ने 23 मार्च 2026 से चली आ रही अपनी हड़ताल वापस लेने की घोषणा की।
महासंघ के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी 27 सूत्रीय मांगें रखीं। इन मांगों में मुख्य रूप से पदोन्नति के अवसर बढ़ाने, वेतनमान में विसंगतियों को दूर करने और पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। मुख्यमंत्री धामी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार इंजीनियरों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखती है। उन्होंने घोषणा की कि इन मांगों के समुचित परीक्षण हेतु एक विशेष सब-कमेटी का गठन किया जाएगा, जो सभी बिंदुओं का गहन अध्ययन कर जल्द ही अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार संवाद और समन्वय के माध्यम से ही समाधान निकालने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा, “राज्य के विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए और जनहित से जुड़े कार्यों को सुचारू रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।” मुख्यमंत्री ने महासंघ की संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि सरकार उनके मुद्दों पर पूरी तरह गंभीर है और जल्द ही ठोस समाधान निकाला जाएगा।

महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष इं. आर.सी. शर्मा ने बताया कि 23 मार्च से जारी हड़ताल के कारण कई विकास योजनाएं प्रभावित हो रही थीं। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए सकारात्मक आश्वासन और सब-कमेटी के गठन के निर्णय के बाद महासंघ ने 10 अप्रैल 2026 को अपनी हड़ताल स्थगित कर दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार जल्द ही मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करेगी।
इस महत्वपूर्ण बैठक में सचिव शैलेश बगौली, दिलीप जावलकर, पंकज कुमार पांडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और महासंघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे। हड़ताल खत्म होने से प्रदेश के विभिन्न विभागों में ठप पड़े निर्माण और तकनीकी कार्यों में अब तेजी आने की उम्मीद है।

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