देहरादून। उत्तराखंड में जातिगत नारों और बयानबाजी ने एक बार फिर सियासी पारा गरमा दिया है। अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा, उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष पंडित मनमोहन शर्मा ने आज यहां आयोजित एक प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार पर समाज को बांटने का आरोप लगाते हुए ब्राह्मणों और स्वर्ण समाज के खिलाफ बढ़ रहे अपमानजनक नारों और यूजीसी एक्ट पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
पंडित शर्मा ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि “सत्यमेव जयते” पर सभी को विश्वास करना चाहिए, न कि जातिगत आधार पर समाज को बांटने वाली राजनीति में उलझना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर जनमानस में जातियों को लड़वाकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना चाहती है, जो अत्यंत दुखद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुस्तान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति सबसे पहले भारतीय है, न कि किसी जाति विशेष का विरोधी।
उन्होंने प्रदेश में बढ़ रही घटनाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया। पंडित शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड जैसे शांतिप्रिय राज्य में दिनदहाड़े हत्याएं होना और ब्राह्मणों की चोटी, जनेऊ, तिलक पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना समाज के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने विशेष रूप से “तिलक तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार”, “ब्राह्मणों से जूता पॉलिश करवाओ” और “अर्न गर्ल बयानबाजी” जैसे नारों को जगह-जगह डपली बजाकर लगाए जाने पर नाराजगी जताई।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान में सभी को समानता का अधिकार दिया था, लेकिन यूजीसी एक्ट के जरिए केंद्र सरकार सवर्ण समाज पर चाबुक चला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आवाज उठाई गई तो कुछ जातियों के लोग खुलकर बिल के समर्थन में आ गए और ब्राह्मणों को गालियां देने लगे।
महासभा की मुख्य मांगों पर बात करते हुए पंडित शर्मा ने कहा कि जातिगत नारों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए और यूजीसी बिल में संशोधन कर जनमानस को समानता का अधिकार दिया जाए। उन्होंने जनमानस से शांति, भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
इस प्रेस वार्ता में पंडित उमाशंकर शर्मा (महासचिव), पंडित लालचंद शर्मा (संरक्षक), पंडित सुरेंद्र दत्त शर्मा (संरक्षक), मनोज कुमार शर्मा (संगठन मंत्री), सत्येंद्र कुमार दीक्षित (प्रदेश युवा अध्यक्ष), संजय खंडूड़ी (जिला अध्यक्ष), राकेश मिश्रा और सचिन दीक्षित (महामंत्री) सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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