सचिवालय के अधिकारी के निजी सचिव पर पत्नी की हत्या का आरोप, धस्माना ने खोली सरकार की ‘महिला सुरक्षा’ की पोल”

देहरादून। उत्तराखंड सचिवालय में तैनात एक वरिष्ठ अधिकारी के निजी सचिव पर उसकी पत्नी की हत्या का आरोप लगा है। यह घटना एक बार फिर राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा का ज्वलंत उदाहरण बन गई है। इस घटना पर एआईसीसी सदस्य एवं उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने तीखी आलोचना की है और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

अपने कैंप कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि यह हत्या उत्तराखंड को एक बार फिर शर्मसार कर गई है। राज्य सरकार बार-बार महिला सुरक्षा के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करती है, “महिलाएं सुरक्षित हैं” के नारे लगाती है, लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं। “महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले में हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड पहले स्थान पर है — यह शर्म की बात है,” धस्माना ने कहा।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में कानून और व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। हत्याएं, बलात्कार, दहेज प्रताड़ना — ये सब घटनाएं रोज सुनवाई पड़ रही हैं, लेकिन सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। “जब राजधानी में ही, सचिवालय जैसे संवेदनशील स्थान पर तैनात किसी अधिकारी के घर में यह घटना हो सकती है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा?” उन्होंने सीधा सवाल उठाया।

धस्माना ने कहा कि इस मामले में नामजद रिपोर्ट (FIR) दर्ज होने के बावजूद अभी तक किसी भी अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह चिंताजनक है। “मृतका का अंतिम वीडियो बयान अपने आप में एक इकबालिया कबूलनामा है। उसने अपने ऊपर हो रहे अत्याचार, मारपीट और प्रताड़ना की पूरी बात कही है। ऐसे में सीबी-सीआईडी जांच होने से क्या फायदा? यह तो अभियुक्तों को बचाने का रास्ता बनेगी,” कांग्रेस नेता ने सीधा आरोप लगाया।

धस्माना का मानना है कि जब सबूत पहले से ही मौजूद हैं, तो तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा रही? “क्या इसलिए कि अभियुक्त सचिवालय से जुड़ा है? क्या पुलिस को सरकार का दबाव है? ये सवाल उठ रहे हैं,” उन्होंने कहा।

कांग्रेस नेता ने सरकार से तीन ठोस मांगें रखी हैं:
1. तत्काल गिरफ्तारी
सभी नामजद अभियुक्तों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। बिना देर किए। पीड़ित परिवार को न्याय का रास्ता तेजी से मिलना चाहिए।

2. न्यायिक जांच आयोग
इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय न्यायिक जांच आयोग गठित किया जाए। सीबी-सीआईडी से कोई फायदा नहीं होगा। अगर सरकार के अधिकारियों का कोई संबंध है, तो वह जांच दब भी सकती है। इसलिए स्वतंत्र न्यायिक जांच जरूरी है।

3. सुरक्षा व्यवस्था में सुधार
महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। कानून कठोर हों, पुलिस प्रशिक्षण बेहतर हो, महिलाओं की शिकायतें जल्दी सुनी जाएं।

धस्माना ने कहा कि हिमालयी राज्यों में जब उत्तराखंड महिला हत्या, बलात्कार और दहेज प्रताड़ना के मामलों में सबसे आगे है, तो यह सरकार के लिए शर्मनाक है। जँहा छोटे राज्य हैं, लेकिन उनमें ऐसी घटनाएं नहीं होतीं। यह सिर्फ तकनीकी बात नहीं है, यह सरकार की विफलता का संकेत है।”

उन्होंने कहा कि यदि सरकार महिला सुरक्षा को गंभीरता से लेती, तो ऐसी घटनाएं नहीं होतीं। “लेकिन जब पुलिस अपनी गिरफ्तारी को लेकर देरी करती है, जब सीबी जांच की बातें होती हैं, तो सवाल उठता है कि क्या कहीं दबाव है?”

सूर्यकांत धस्माना ने सरकार को एक स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर जनांदोलन करेगी। “महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए कोई भी कदम पीछे नहीं ले सकता। हम सरकार को चेतावनी दे रहे हैं कि यह इंसाफ नहीं दे सकती, तो आंदोलन के लिए तैयार रहो।”

धस्माना ने पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। “हम पीड़ित के परिवार के साथ हैं। उन्हें न्याय मिलना चाहिए। उनकी महिला को सही-सलामत घर वापस मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब कम से कम अभियुक्तों को उचित सजा मिले — यह हम सब की जिम्मेदारी है।”

राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि सचिवालय जैसे संवेदनशील स्थान पर तैनात अधिकारियों के लिए चरित्र संबंधी जांच और सत्यापन अधिक कड़े होने चाहिए। “अगर सचिवालय में ही महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहे हैं, तो राज्य की स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं। यह तो व्यवस्था ही विफल है।”

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