
देहरादून।उत्तराखंड की स्थाई राजधानी को लेकर एक बार फिर सियासी और जन आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है। गैरसैंण (भराड़ीसैंण) को पूर्णकालिक राजधानी घोषित करने की मांग को लेकर वरिष्ठ आंदोलनकारी आनंद राम ने देहरादून में अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू कर दिया है।
सहस्त्रधारा रोड स्थित अनशन स्थल पर सोमवार सुबह से आंदोलनकारी जुटने लगे। ‘प्राण से पण तक’ के संकल्प के साथ शुरू हुए इस अनशन को स्थानीय लोगों, युवाओं और पूर्व सैनिकों का समर्थन मिल रहा है। आंदोलन स्थल पर देशभक्ति के नारों के बीच गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग जोर पकड़ती दिखी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड गठन के वर्षों बाद भी राज्य आंदोलन की मूल भावना को नजरअंदाज किया गया है। उनका आरोप है कि गैरसैंण को केवल ग्रीष्मकालीन राजधानी तक सीमित रखना पहाड़ के लोगों और राज्य आंदोलन के शहीदों के सपनों के साथ अन्याय है।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे आनंद राम ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश का संचालन भौगोलिक रूप से केंद्र में स्थित गैरसैंण से होना चाहिए, ताकि पहाड़ों का संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने इसे “आर-पार की लड़ाई” बताते हुए कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय की आवश्यकता है।
आंदोलनकारियों ने चार प्रमुख मांगें सामने रखी हैं, जिनमें गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित करना, पहाड़ी क्षेत्रों के साथ न्याय सुनिश्चित करना, राज्य आंदोलन के शहीदों के सपनों को साकार करना और आम जनता से इस आंदोलन में व्यापक भागीदारी की अपील शामिल है।
अनशन स्थल से मातृशक्ति, युवाओं और पूर्व सैनिकों से बड़ी संख्या में जुड़ने का आह्वान किया गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह केवल राजधानी का मुद्दा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अस्मिता और संतुलित विकास से जुड़ा सवाल है।
वहीं, इस आंदोलन के तेज होने से राज्य सरकार पर भी दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ सकता है।

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