
देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड के टिहरी जिले की माटी से निकले विश्वविख्यात निशानेबाज जसपाल राणा (49) अब इस दुनिया में नहीं रहे। जर्मनी से स्वदेश लौट रहे जसपाल राणा की विमान यात्रा के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां हृदय संबंधी बीमारी के चलते उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके असमय निधन से देश-दुनिया के खेल प्रेमियों में शोक की गहरी लहर व्याप्त हो गई है।
जौनपुर ब्लॉक के भाल गांव में जन्मे जसपाल राणा को निशानेबाजी की प्रारंभिक शिक्षा उनके पिता नारायण सिंह राणा से मिली, जो बीएसएफ में अधिकारी रहे। मात्र 12 वर्ष की कच्ची उम्र में अहमदाबाद में हुई 31वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा की झलक दिखा दी थी।
वर्ष 1994 में 46वीं विश्व शूटिंग चैंपियनशिप के जूनियर वर्ग में स्टैंडर्ड पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने भारत का परचम लहराया। अपने स्वर्णिम करियर में उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर 600 से अधिक पदक अपने नाम किए। उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार एवं वर्ष 2002 में पद्मश्री से अलंकृत किया।
एक श्रेष्ठ खिलाड़ी के साथ-साथ कुशल प्रशिक्षक के रूप में भी जसपाल राणा ने भारतीय निशानेबाजी को नई पीढ़ी दी। उनके जाने से उत्तराखंड ने अपना एक अमूल्य रत्न खो दिया है।

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