ऑनलाइन नकली दवाओं के अंतरराष्ट्रीय गिरोह पर STF की सर्जिकल स्ट्राइक, दो गिरफ्तार

“Operation Fake Pill” में उत्तराखंड STF ने किया बड़ा खुलासा, बिहार से पंजाब तक फैला था नेटवर्क

देहरादून। जीवन बचाने वाली दवाइयों को ही मौत का सौदागर बना देने वाले एक खतरनाक अंतरराज्यीय गिरोह पर उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। “Operation Fake Pill” नाम से चलाए जा रहे इस अभियान में STF ने उस गिरोह का पर्दाफाश किया जो देश की नामी-गिरामी दवा कंपनियों — Sunpharma, Mankind, Zydus, Glenmark, Torrent और Macleods — के नाम पर नकली दवाइयां बनाकर फेसबुक पेज के जरिए ऑनलाइन बेच रहा था।

मुख्यमंत्री उत्तराखंड के “ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान” और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देशों के तहत STF ने विगत दो महीनों से इस गिरोह पर नजर रखते हुए इनपुट विकसित किए। जांच में सामने आया कि “एसके हेल्थ केयर”नाम के फेसबुक पेज पर ब्रांडेड कंपनियों के उत्पादों की असली तस्वीरें लगाकर उन्हें आधे से भी कम कीमत पर बेचा जा रहा था। STF ने काल्पनिक नाम से दवाइयां मंगवाईं तो वाराणसी से कोरियर के जरिए देहरादून Gudcef Plus (22 बॉक्स) और Tydol 100 (10 बॉक्स) की नकली दवाइयां पहुंचीं — और गिरोह जाल में फंस गया।

STF के शिकंजे में आए दो अभियुक्त हैं

जतिन सैनी पुत्र कैलाश, निवासी बेगम सराय, जिला सम्भल (उत्तर प्रदेश)

गौरव त्यागी पुत्र जीवन त्यागी, निवासी साईं लोक, जीएमएस रोड, देहरादून (मूल निवास खरखौदा, मेरठ)

पूछताछ में गौरव त्यागी ने स्वीकार किया कि रुड़की में उसकी एक नकली दवा फैक्ट्री पहले भी पकड़ी जा चुकी है। इसके बावजूद वह अपने रिश्ते के भाई मयंक उर्फ मोंटी के साथ मिलकर भगवानपुर (हरिद्वार) क्षेत्र में नई फैक्ट्री चला रहा था। कोटद्वार के SIDCUL क्षेत्र में भी एक बंद पड़ी फैक्ट्री में जरूरत के वक्त नकली दवाइयां बनाई जाती थीं। गौरव त्यागी के विरुद्ध हरिद्वार, देहरादून और महाराष्ट्र में पहले से 03 अन्य मामले दर्ज हैं।

गिरोह के सदस्य फर्जी सिम कार्ड के जरिए एक-दूसरे से संपर्क में रहते थे। ब्रांडेड कंपनियों के पैकेजिंग की हूबहू नकल कर उसमें कूटरचित दस्तावेज प्रिंट किए जाते थे और नकली दवा भरकर ऑनलाइन बेची जाती थी। बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब और उत्तराखंड के कुछ लालची दवा विक्रेता इन्हें आधे दाम में खरीदकर पूरी MRP पर बेचते थे। ये दवाइयां लैब टेस्ट में फेलपाई गई हैं, जिससे मरीजों की जान को सीधा खतरा था। इस नेटवर्क का मुख्य संचालन जिला सम्भल, उत्तर प्रदेश से हो रहा था।

STF एवं संबंधित ड्रग विभाग की टीमें रुड़की और कोटद्वार की फैक्ट्रियों में छापेमारी कर रही हैं। कोटद्वार की बंद फैक्ट्री को सीजकिया जा रहा है और फोरेंसिक टीम मौके पर भेजी गई है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

अभियुक्तों के विरुद्ध साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में BNS की धाराओं — संगठित अपराध (111), धोखाधड़ी (318), जालसाजी (338), आपराधिक षड्यंत्र (61) — के अलावा NDPS Act, Copyright Act और IT Act के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

STF ने आम नागरिकों से अपील की है कि —

– बिना बिल के दवा न खरीदें, बैच नंबर अवश्य मिलाएं

– MRP से अधिक छूट के लालच में न पड़ें

– अनजान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से दवा न खरीदें

– नकली दवा की जानकारी मिलने पर STF को सूचित करें

STF हेल्पलाइन: 0135-2656202 / 9412029536 (सूचनाकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा)

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