हिमालयन अस्पताल के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, 60 वर्षीय महिला को मिली नई ज़िंदगी
देहरादून / डोईवाला। हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एचआईएमएस), जौलीग्रांट के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए एक 60 वर्षीय महिला के मस्तिष्क में मौजूद चार खतरनाक ब्रेन एन्यूरिज़्म (गुब्बारे जैसी सूजन) का सफल इलाज एक ही सत्र में कर दिखाया। यह जटिल ऑपरेशन एंडोवस्कुलर कॉइलिंग तकनीक के माध्यम से किया गया, जिसे आमतौर पर अलग-अलग चरणों में अंजाम दिया जाता है।
अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉ. बृजेश तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि महिला उनकी ओपीडी में आंखों के पीछे तेज दर्द, दोहरा दिखाई देना और गर्दन में अकड़न जैसी शिकायतों के साथ पहुंची थी। जांच के दौरान पता चला कि महिला के दिमाग की दाईं और बाईं नसों में चार स्थानों पर एन्यूरिज़्म विकसित हो चुके थे। ये सूजनें अत्यंत खतरनाक होती हैं और यदि फट जाएं तो दिमाग में अचानक रक्तस्राव हो सकता है, जिससे तत्काल मृत्यु का खतरा भी रहता है।
डॉ. तिवारी ने बताया कि सामान्यत: एक से अधिक एन्यूरिज़्म होने पर उनका इलाज अलग-अलग सत्रों में किया जाता है, जिसमें मरीज को बार-बार बेहोश करना पड़ता है। इससे जोखिम और जटिलताएं बढ़ जाती हैं। लेकिन इस मामले में पूरी मेडिकल टीम ने समन्वय के साथ एक ही बार में सभी एन्यूरिज़्म का इलाज करने का निर्णय लिया।
इलाज के दौरान एंडोवस्कुलर कॉइलिंग तकनीक का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में मरीज की जांघ की धमनी के माध्यम से एक अत्यंत पतली नली (कैथेटर) को सावधानीपूर्वक मस्तिष्क की नसों तक पहुंचाया गया। इसके बाद चारों एन्यूरिज़्म में प्लैटिनम के महीन तार (कॉइल) भरे गए, जिससे उन सूजनों के भीतर रक्त का प्रवाह बंद हो गया और फटने का खतरा समाप्त हो गया।
इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व डॉ. बृजेश तिवारी ने किया। उनके साथ विभागाध्यक्ष डॉ. रंजीत कुमार की निगरानी में डॉ. संजीव पांडे, डॉ. अंकित भाटिया, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. मोहित और एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. निरूपा ने बेहतर समन्वय के साथ ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
डॉक्टरों के अनुसार, महिला अब पूरी तरह स्वस्थ हो रही है और सामान्य जीवन की ओर लौट रही है। इस उपलब्धि ने हिमालयन अस्पताल को जटिल और जानलेवा न्यूरो-ऑपरेशनों के लिए देश के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों की श्रेणी में स्थापित कर दिया है।
एसआरएचयू के अध्यक्ष डॉ. विजय धस्माना ने न्यूरोसर्जरी विभाग और पूरी टीम को इस उल्लेखनीय सफलता पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता के माध्यम से मरीजों को सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराना है, और यह सफलता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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