

नई दिल्ली। उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी जिम मालिक दीपक कुमार, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से जाना जाता है, को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिल गई है। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी स्थगन लगा दिया गया है, जिसमें उन्हें घटना और मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट करने से रोका गया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सोमवार को दीपक कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया। याचिका में उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द करने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी थी। पीठ ने उत्तराखंड सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। इस बीच एफआईआर के आधार पर आगे की कार्यवाही स्थगित रहेगी।
वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंघवी ने दीपक की ओर से दलील दी। उन्होंने पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल पर व्यापक गैग ऑर्डर भी लगाया गया था। सिंघवी ने तर्क दिया कि एक व्यक्ति ने बुजुर्ग दुकानदार की मदद के लिए हस्तक्षेप किया था, फिर भी उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर दिया गया।
जनवरी की घटना से जुड़ा विवाद
मामला 26 जनवरी 2026 को कोटद्वार में हुई घटना से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ दक्षिणपंथी कार्यकर्ता (बजरंग दल से जुड़े बताए गए) एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद की दुकान के नाम में ‘बाबा’ शब्द इस्तेमाल करने पर आपत्ति जता रहे थे और उन्हें परेशान कर रहे थे। दीपक कुमार ने इस दौरान हस्तक्षेप किया। जब उनसे नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा— “मेरा नाम मोहम्मद दीपक है।” यह वीडियो वायरल हो गया था।
इस घटना के बाद बजरंग दल सदस्य की शिकायत पर दीपक कुमार और उनके सहयोगी विजय रावत के खिलाफ दंगा, चोट पहुंचाने और शांति भंग करने जैसे आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई। दीपक ने हाईकोर्ट में एफआईआर रद्द करने, पुलिस सुरक्षा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। मार्च में हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इनकार करते हुए जांच में सहयोग करने और सोशल मीडिया पर बयान न देने का निर्देश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब दीपक के खिलाफ दर्ज मामले में फिलहाल कोई आगे की कार्रवाई नहीं हो सकेगी। संबंधित पक्षों के जवाब आने के बाद शीर्ष अदालत मामले की अगली सुनवाई करेगी।

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