

नई दिल्ली/देहरादून।जंतर-मंतर पर आयोजित आंदोलन के दौरान पुलिस सेवा से इस्तीफा देने का दावा करने वाले उत्तराखंड पुलिस के सिपाही शेर सिंह का मामला नया मोड़ ले चुका है। वीडियो सामने आने के कुछ ही समय बाद उत्तराखंड पुलिस ने स्पष्ट किया कि संबंधित सिपाही पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले में नामजद होने के कारण निलंबित चल रहा है।
कुमाऊं परिक्षेत्र की आईजी निवेदिता कुकरेती ने वीडियो संदेश जारी कर बताया कि शेर सिंह का आपराधिक इतिहास रहा है और उसे 20 जुलाई 2026 को विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबित किया जा चुका था। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के बाद उसके सेवा रिकॉर्ड और लंबित मामलों की समीक्षा की गई।
उत्तराखंड एसटीएफ ने सितंबर 2025 में कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि गैंग से जुड़े करोड़ों रुपये की संपत्ति हड़पने के मामले का खुलासा करते हुए शेर सिंह और पुलिसकर्मी हसन जैदी को गिरफ्तार किया था। जांच में आरोप लगा कि दोनों ने गैंग के सदस्यों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति के अवैध सौदों में भूमिका निभाई।
एसटीएफ के अनुसार, जांच के दौरान दोनों पुलिसकर्मियों के संबंध प्रवीण वाल्मीकि के भतीजे मनीष बॉलर से जुड़े पाए गए थे। आरोप था कि रुड़की स्थित एक बहुमूल्य जमीन के सौदे में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और एक परिचित महिला के नाम एग्रीमेंट कराने में भी सहयोग किया।

जांच एजेंसी के अनुसार, पूरा मामला वर्ष 2014 में श्याम बिहारी की मृत्यु के बाद छोड़ी गई करोड़ों रुपये की संपत्ति से जुड़ा है। आरोप है कि संपत्ति पर कब्जा करने की नीयत से वर्ष 2018 में कृष्ण गोपाल की हत्या कर दी गई। बाद में श्याम बिहारी की पत्नी रेखा पर संपत्ति अपने नाम कराने का दबाव बनाया गया।
जब परिवार ने विरोध किया तो वर्ष 2019 में रेखा के भाई सुभाष पर जानलेवा हमला कराया गया। इसके बाद परिवार भय के कारण क्षेत्र छोड़कर चला गया। एसटीएफ का आरोप है कि इसी दौरान रेखा और स्नेहलता के नाम से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर करोड़ों रुपये की संपत्ति का सौदा कर दिया गया।
शेर सिंह के खिलाफ हरिद्वार के गंगनहर थाने में मुकदमा संख्या 415/2025 दर्ज है। उस पर भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 467, 468, 471 और 120-बी सहित भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
एसटीएफ ने शेर सिंह और हसन जैदी को 15 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा था। बाद में शेर सिंह को 7 नवंबर 2025 को नैनीताल हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जमानत मिलने के बाद वह अपनी तैनाती स्थल पिथौरागढ़ में बिना सूचना अनुपस्थित रहा। विभागीय नोटिसों का जवाब नहीं देने पर 20 जुलाई 2026 को उसे निलंबित कर दिया गया।

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