
देहरादून। देहरादून में गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने की मांग एक बार फिर सड़कों पर गूंज उठी। रविवार को स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति के आह्वान पर शहर में जन-जागरण पदयात्रा निकाली गई, जिसमें खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। तेज बारिश के बीच भी आंदोलनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे पूरे जोश के साथ आगे बढ़ते रहे।
सुबह करीब नौ बजे परेड ग्राउंड से शुरू हुई यह पदयात्रा पूर्व आईएएस अधिकारी और समिति के अध्यक्ष विनोद रतूड़ी के नेतृत्व में निकली। यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों—सर्वे चौक, नालापानी चौक, एकता विहार स्थित आंदोलन स्थल, आईटी पार्क रोड, कैनाल रोड और राजपुर रोड—से होते हुए राजपुर गांव तक पहुंची। इसके बाद प्रतिभागी वापस शहर की ओर लौटे। इस पूरे दौरान करीब 20 किलोमीटर का सफर तय किया गया।
पदयात्रा के समापन का कार्यक्रम घंटाघर के पास स्थित उत्तराखंड आंदोलन के अग्रणी नेता स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की प्रतिमा स्थल पर रखा गया था, जहां आंदोलन से जुड़े गीतों और स्मृतियों के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त की गईं। रास्ते भर आंदोलनकारियों ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर अपनी मांग के समर्थन में माहौल बनाने का प्रयास भी किया।
समिति का कहना है कि यह आंदोलन अचानक नहीं उठा है। एकता विहार में पिछले 84 दिनों से क्रमिक अनशन जारी है, जिसमें रोजाना अलग-अलग कार्यकर्ता बैठकर अपनी मांग दोहराते रहे हैं। हालांकि अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया गया।
पदयात्रा में शामिल युवाओं ने भी अपनी बात खुलकर रखी। एक आंदोलनकारी ने कहा कि गैरसैंण का मुद्दा केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि पहाड़ के लोगों की पहचान और अधिकारों से जुड़ा विषय है। उनका आरोप था कि वर्षों से अलग-अलग सरकारें इस मांग को टालती रही हैं और इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।
समिति के अनुसार यह मुहिम किसी एक संगठन या दल की नहीं, बल्कि उत्तराखंड राज्य के गठन के समय देखे गए उस सपने से जुड़ी है, जिसमें गैरसैंण को राजधानी बनाने की परिकल्पना की गई थी। उन्होंने प्रदेशभर के लोगों, खासकर युवाओं और महिलाओं से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।

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