“गैरसैंण आंदोलन का महासंग्राम”: अनशन समाप्त, अब ‘प्रण से प्राण तक’ की लड़ाई

13 अगस्त को सामूहिक बाल मुंडन और 15 अगस्त को ऐतिहासिक पदयात्रा

देहरादून। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन आज 21 जून को एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया। विगत 8 मार्च 2026 से जारी क्रमिक अनशन का आज समापन हुआ, लेकिन आंदोलनकारियों ने इसे संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि एक आर-पार के महा-आंदोलन की शुरुआत बताया।

पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतुड़ी के नेतृत्व में यह जन-आंदोलन अब ‘प्रण से प्राण तक’ लड़ने के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार की बेरुखी और दमनकारी रवैया अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आगामी कार्यक्रम:
· 13 अगस्त 2026 – सरकार की संवेदनहीनता के विरोध में सभी आंदोलनकारी सामूहिक बाल मुंडवाकर अपना आक्रोश दर्ज करेंगे।
· 15 अगस्त 2026 – स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर देहरादून से गैरसैंण तक एक विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी, जो सत्ता की चूलें हिलाकर रख देगी।

आज समापन अवसर पर पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतुड़ी, अनिल बहुगुणा, पार्थ रतुड़ी, सचिन थपलियाल, पूर्व आईएएस एस.एस. पंक्ति, ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल, गोपाल दत्त कुमेडी, सत्य प्रकाश कोठियाल, रामेश्वर शर्मा, प्रकाश थपलियाल, दुर्गा प्रसाद थपलियाल, अवदेश शर्मा, मनमोहन शर्मा, विजय भारत कंडारी, कुलदीप अग्रवाल, सुशील सिंह कैंतुरा और अनुसूया रतुड़ी सहित सैकड़ों स्वाभिमानी क्रांतिकारी उपस्थित रहे।

सभी ने एक सुर में कहा – “हम न रुकने वाले हैं, न झुकने वाले हैं। यह संघर्ष तब तक थमेगा नहीं, जब तक गैरसैंण को उसका वास्तविक अधिकार नहीं मिल जाता।”

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