देवभूमि की पहचान खतरे में – करन माहरा ने अंजेल चकमा की मौत पर भाजपा सरकार को ठहराया जिम्मेदार

देहरादून। त्रिपुरा के छात्र अंजेल चकमा की दर्दनाक मौत के बाद उत्तराखंड में नस्लीय हिंसा को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने इस घटना को “राज्य की बदली हुई पहचान” का प्रतीक बताते हुए भाजपा सरकार पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

माहरा ने कहा कि उत्तराखंड हमेशा “शांति, भाईचारे और अतिथि देवो भव” की धरती माना गया है, लेकिन आज हालत यह है कि छात्रों को अपने रंग और चेहरे के आधार पर भारतीयता साबित करनी पड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या यह वही देवभूमि है जो विविधता और सम्मान के लिए जानी जाती थी?”

कांग्रेस नेता ने सरकार की चुप्पी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि भाजपा के शासनकाल में उत्तराखंड की पहचान बदल रही है—जहाँ कभी सुरक्षा की भावना थी, वहाँ अब डर और अविश्वास फैल रहा है। माहरा ने कहा कि यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि शासन की नाकामी का परिणाम है।

दिवंगत अंजेल चकमा

उन्होंने माँग की कि केंद्र और राज्य सरकार तत्काल कार्रवाई करते हुए ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कठोर एंटी-रैसिज़्म कानून बनाएँ, ताकि भविष्य में किसी नागरिक को अपनी भारतीय पहचान साबित करने की मजबूरी न उठानी पड़े।

माहरा ने अंत में कहा, “अंजेल चकमा की आवाज हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है—और भाजपा सरकार इससे जवाबदेही से भाग नहीं सकती।”

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