

देहरादून। चमकती लाल-नीली बत्ती, रौबदार खाकी वर्दी, हाथ में वायरलेस सेट और जुबां पर ऐसी धमक कि अच्छे-अच्छे नतमस्तक हो जाएं। खुद को कभी रॉ (RAW) का खुफिया एजेंट, कभी सेना का सीनियर कमांडर, तो कभी रसूखदार आईपीएस (IPS) अफसर बताने वाला यह शख्स जिस महफिल में जाता, लोग सम्मान में खड़े हो जाते। लेकिन किसी को क्या पता था कि वर्दी के इस रौब के पीछे कानून को ठेंगा दिखाने वाला देश का एक शातिर बहरूपिया छिपा है!
देहरादून के एसएसपी की एक अचूक और सटीक रणनीति ने आखिरकार इस हाई-प्रोफाइल सस्पेंस से पर्दा उठा दिया है। राजपुर पुलिस ने एक ऐसे ‘फर्जी साहब’ को दबोचा है, जिसकी कहानी किसी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है।
राजपुर थाना पुलिस की मुस्तैदी और सटीक रणनीति से एक ऐसे शातिर जालसाज को गिरफ्तार किया गया है, जो खुद को फर्जी आईपीएस और रॉ (RAW) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। गिरफ्तार अभियुक्त आर० यशोवर्धन (35 वर्ष) एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी का पुत्र है, जो बचपन से पिता के रसूख और सुख-सुविधाओं को देखकर खुद भी लाल बत्ती का अफसर बनने का सपना पाले हुए था। यूपीएससी की परीक्षा में लगातार असफल होने के बाद उसने शॉर्टकट अपनाया और नकली वर्दी व फर्जी पहचान पत्र के सहारे ठगी का साम्राज्य खड़ा कर लिया।

इस सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब हाल ही में दो पीड़ितों ने राजपुर थाने में तहरीर दी। पहले मामले में डाकरा बाजार निवासी अंशुल उपाध्याय से आरोपी ने होटल जिंजर में मुलाकात की और उनकी दिवंगत माता की स्मृति में कंपनी का पंजीकरण कराने के नाम पर 15 लाख रुपये हड़प लिए। वहीं, कैनाल रोड स्थित सोशल स्टेज हॉस्टल की निवासी डॉ० अनुषा को रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसलटेंट के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर आरोपी ने फर्जी विजिटिंग कार्ड दिखाए और 4.60 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
एसएसपी के निर्देश पर डालनवाला क्षेत्राधिकारी नितिन लोहानी और राजपुर थानाध्यक्ष पी०डी० भट्ट के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज खंगालते हुए घेराबंदी की और आरोपी यशोवर्धन को सीएसआई तिराहा, मसूरी रोड से गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान अभियुक्त के पास से पांच फर्जी आई कार्ड, आठ फर्जी विजिटिंग कार्ड, 25 पुलिस व आर्मी के लोगो, तीन जोड़ी सेना व पैरामिलिट्री की वर्दी, तीन फर्जी रिबन, एक वायरलेस सेट और एक लैपटॉप बरामद किया गया है। आरोपी ने कबूल किया कि वह रौब झाड़ने और लोगों को झांसे में लेने के लिए सालों से इस वर्दी और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहा था।

इस सफल कार्रवाई में उपनिरीक्षक अनित कुमार, कांस्टेबल अमित, मोहित और एसओजी के तकनीकी सहायक किरण कुमार की मुख्य भूमिका रही।

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