
देहरादून। उत्तराखंड में चिन्हिकरण (पहचान पत्र) और दस प्रतिशत आरक्षण सहित अन्य मांगों को लेकर आंदोलनकारी एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। चिन्हित आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक धीरेंद्र प्रताप ने एलान किया कि 29 मई को जिलाधिकारी देहरादून का घेराव किया जाएगा। यह फैसला शहीद स्मारक में आयोजित एक बड़ी बैठक के दौरान लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच (यूएएम) के अध्यक्ष जगमोहन नेगी ने की। इस मौके पर धीरेंद्र प्रताप ने लोगों से 29 मई को बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार को चिन्हित आंदोलनकारियों की मांगों पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए, अन्यथा संघर्ष और तीव्र किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन पूर्ण सिंह लिंगवाले ने किया।
बैठक को संबोधित करते हुए आंदोलनकारी समिति के केंद्रीय प्रवक्ता महेश जोशी ने कहा कि प्रस्तावित 15 साल की स्थायी निवास अवधि से मूल निवासियों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत मूल निवास नियम लागू करे। साथ ही राजनीतिक परिसीमन को लेकर उन्होंने चिंता जताई कि इससे पहाड़ की सीटें घट सकती हैं। जोशी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति, वेशभूषा और लोक कला को सुरक्षित रखने के लिए राज्य को अनुसूची-5 (शेड्यूल 5) के दायरे में लाना आवश्यक है। इससे न केवल अधिकारों की रक्षा होगी, बल्कि परिसीमन में पहाड़ी सीटों में वृद्धि भी सुनिश्चित होगी।
इससे पहले समिति के नगर अध्यक्ष ललित और जिला अध्यक्ष विशंभर बौठियाल ने भी लोगों को संबोधित किया। इसके अलावा जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, महामंत्री रामलाल खंडूरी, सत्या पोखरियाल, द्वारका बिश्नेट सहित अन्य प्रमुख नेताओं ने भी बैठक में अपने विचार रखे। सभी नेताओं ने एकजुट होकर 29 मई को जिलाधिकारी कार्यालय को घेरने और सरकार को मांग पत्र सौंपने की रणनीति बनाई।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि समय रहते मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन का और विस्तार किया जाएगा। फिलहाल 29 मई को देहरादून में DM कार्यालय के बाहर सैकड़ों आंदोलनकारियों के जुटने की संभावना है।

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