
देहरादून: उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने साइबर अपराधियों के विरुद्ध एक बड़े और साहसिक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए जम्मू-कश्मीर के बडगाम से दो शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर देशभर के लोगों से करोड़ों की ठगी कर रहा था। एसटीएफ की इस कार्रवाई ने न केवल एक संगठित आपराधिक नेटवर्क को बेनकाब किया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए उत्तराखंड पुलिस देश के किसी भी कोने में और किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में कार्रवाई करने में सक्षम है।
वरिष्ठ नागरिक से 65 लाख की ठगी का मामला
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत देहरादून निवासी एक 71 वर्षीय बुजुर्ग की शिकायत से हुई। ठगों ने अत्यधिक शातिराना अंदाज में पीड़ित को अपना शिकार बनाया। नवंबर 2025 में पीड़ित को एक कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया। उसने पीड़ित को डराया कि उनके विरुद्ध दिल्ली में धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। इसके बाद मामले को सीबीआई और दिल्ली पुलिस के फर्जी अधिकारियों को सौंप दिया गया। आरोपियों ने पुलिस की वर्दी पहनकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल की और फर्जी दस्तावेज व गैर-जमानती वारंट दिखाकर बुजुर्ग को घर के भीतर ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया। जांच और वेरिफिकेशन के नाम पर डरा-धमकाकर ठगों ने बुजुर्ग से करीब 65 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
बडगाम की चुनौतीपूर्ण वादियों में एसटीएफ का ऑपरेशन
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) एसटीएफ, श्री अजय सिंह के निर्देशन में एक विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी विश्लेषण और डेटा खंगालने के बाद ठगों की लोकेशन जम्मू-कश्मीर के बडगाम में ट्रेस हुई। जब उत्तराखंड की टीम वहां पहुंची, तो स्थितियां बेहद प्रतिकूल थीं। गिरफ्तारी के दौरान स्थानीय भीड़ ने पुलिस टीम को घेर लिया और थाने से लेकर कोर्ट परिसर तक भारी दबाव बनाने का प्रयास किया। संवेदनशील क्षेत्र होने और पूर्व में वहां हुए ग्रेनेड हमलों के इतिहास के बावजूद, उत्तराखंड एसटीएफ ने अदम्य साहस का परिचय दिया। टीम ने धैर्यपूर्वक कानूनी पैरवी की और स्थानीय पुलिस के सहयोग से दो अभियुक्तों—शौकत हुसैन मलिक और बिलाल अहमद मल्ला—को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर लिया।
7 राज्यों तक फैला था ठगी का जाल
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ और तकनीकी जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पकड़े गए अभियुक्तों के पास से 3 मोबाइल फोन, कई एटीएम कार्ड और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं। जांच में पाया गया कि इन अभियुक्तों द्वारा संचालित बैंक खातों में महज कुछ महीनों के भीतर लाखों-करोड़ों का ट्रांजैक्शन हुआ है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन संदिग्ध खातों के विरुद्ध उत्तराखंड समेत देश के 7 राज्यों में साइबर ठगी की शिकायतें पहले से दर्ज हैं। यह गिरोह फर्जी सिम कार्ड और बैंक खातों का एक पूरा जाल बुनकर देशभर में ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
सावधान रहें, ‘डिजिटल अरेस्ट’ से न डरें
इस बड़ी कामयाबी के बाद एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने आम जनता के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। कोई भी सरकारी एजेंसी जैसे सीबीआई, ईडी या पुलिस व्हाट्सएप कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। उन्होंने जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल से न डरें और संदेह होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाईन नंबर या साइबर क्राइम की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
एसटीएफ की इस सफलता में निरीक्षक देवेंद्र नबियाल, राजेश सिंह और उनकी पूरी टीम की मुख्य भूमिका रही, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में राज्य का मान बढ़ाया।

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