क्यों अमर हैं अमरनाथ के ये दो सफेद कबूतर? जानें पौराणिक रहस्य

हिमालय की दुर्गम और बर्फीली वादियों में स्थित बाबा अमरनाथ का धाम करोड़ों शिवभक्तों की आस्था का सर्वोच्च केंद्र है। यहाँ हर साल बनने वाला पवित्र हिम शिवलिंग तो अपने आप में चमत्कार है ही, लेकिन इस गुफा से जुड़ा एक और ऐसा दिव्य रहस्य है जो विज्ञान की समझ से परे और श्रद्धालुओं के अटूट विश्वास का प्रतीक है। हम बात कर रहे हैं उन दो सफेद कबूतरों की, जिन्हें इस निर्जन और शून्य से नीचे के तापमान वाली गुफा में आज भी देखा जाता है। क्या है इन कबूतरों का ‘अमरत्व’ कनेक्शन?

भक्तों की आस्था: आज भी होते हैं दर्शन
मान्यता है कि आज भी भाग्यशाली श्रद्धालुओं को इन कबूतरों के दर्शन होते हैं। शून्य डिग्री से भी कम तापमान में जहां दाना-पानी मिलना असंभव है, वहां इन पक्षियों का जीवित रहना किसी ईश्वरीय चमत्कार से कम नहीं माना जाता। भक्तों का विश्वास है कि इनके दर्शन होने का अर्थ है कि उन पर स्वयं महादेव की विशेष कृपा हुई है और उनके मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

अमरनाथ गुफा में दिखने वाले दो सफेद कबूतरों की अनसुनी अमरकथा
धरती का स्वर्ग कही जाने वाली कश्मीर घाटी में स्थित श्री अमरनाथ जी की पवित्र गुफा में प्रतिवर्ष बर्फ से बनने वाले प्राकृतिक हिमशिवलिंग की पूजा की जाती है। श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा में भगवान शंकर ने शिव धाम की प्राप्ति करवाने वाली परम पवित्र ‘अमर कथा’ भगवती पार्वती को सुनाई थी। मान्यता है की अमरनाथ गुफा एक ऐसा स्थान है जहां भगवान शिव माता पार्वती के साथ कबूतर रूप में निवास करते हैं। इसी पवित्र गुफा में भगवान शिव और माता पार्वती कई युगों से कबूतर के रूप में विराजमान हैं। इस संदर्भ में कथा यह है कि एक समय माता पार्वती द्वारा अमर होने की कथा सुनने की जिद्द करने पर भगवान शिव शंकर पार्वती को लेकर इस स्थान पर आए।

जब भगवान शिव ने त्यागे अपने आभूषण
अमरत्व की कथा माता पार्वती के अलावा कोई अन्य न सुन सके इसलिए भगवान शिव ने मार्ग में पहलगाम में नंदी को छोड़ा। चंदनवाड़ी में चंद्रमा का त्याग किया। शेषनाग झील पर अपने गले के सर्प को उतारा। महागुणस पर्वत पर पुत्र गणेश को छोड़ा। पंचतरणी में पंचतत्वों का त्याग किया। इसके बाद पार्वती जी को साथ लेकर गुफा में प्रवेश किया।

सो गईं माता पार्वती, कबूतरों ने सुनी पूरी कथा
शिव जी से अमर होने की कथा सुनते-सुनते माता पार्वती को नींद आ गई। इस दौरान उस गुफा में कबूतर के दो बच्चों ने जन्म लिया और उसने शिव जी से पूरी कथा सुन ली। जब शिव जी को इस बात का ज्ञान हुआ कि अमर होने की कथा कबूतरों ने सुन ली है तब उन्हें मारने के लिए आगे बढ़े।

महादेव के क्रोध से मिला वरदान
कबूतरों ने शिव जी से कहा कि अगर आपने हमें मार दिया तो अमर होने की कथा झूठी साबित हो जाएगी। शिव जी ने तब उन कबूतरों को वरदान दिया कि तुम युगों-युगों तक इस स्थान पर शिव-पार्वती के प्रतीक बनकर निवास करोगे। अमरनाथ की गुफा में जिसे भी तुम्हारे दर्शन होंगे उन्हें शिव-पार्वती के दर्शन का पुण्य मिलेगा।

अस्वीकरण (Disclaimer)
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