महाशिवरात्रि: सत्य ही शिवत्व

“महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिवत्व के सत्य को समझने का अवसर मिलता है। प्रेम वह शक्ति है जो समस्त प्राणीमात्र को एकसूत्र में बांधती है, और इसी प्रेम का आधार है शिवत्व।”

प्रेम प्राणीमात्र को एकसूत्र में बांधने वाली शक्ति है, प्रेम का आधार शिवत्व ही है।

शिवत्व का अर्थ:

  • शिवत्व अर्थात् कल्याण के उच्चतर स्तर पर उठना जहां दूसरा कोई शेष न रहे।
  • भगवान् शिव कण-कण में व्याप्त हैं।

भगवान् शिव का जीवन:

  • शिवजी का सारा जीवन बुराइयों के नाश और भलाई की स्थापना के लिए है।
  • देवताओं के कल्याण के लिए कंठ में विष धारण किया और नीलकंठ कहलाए।
  • दानवों का दमन कर शिवत्व की स्थापना की।

शिव का व्यक्तित्व:

  • समन्वय, सहिष्णुता, प्रेम, शान्ति और कल्याण के आधार।
  • अर्धनारीश्वर होकर भी काम विजेता, गृहस्थ होते हुए भी गृहस्थी के प्रपंचों से दूर।
  • प्रलयकालीन अग्नि और हिम शीतल गंगा का शृंगार।

शिव का प्रभाव:

  • न्याय एवं प्रेम के आदर्श रूप।
  • अज्ञान के बंधनों का नाश।
  • जीवन की ऊर्जा और चेतना।

जीवन का संदेश:

  • जीवन की पूर्णता बंटने में नहीं, एक होने में है।
  • द्वन्द्व सदैव रहेगा: सुख-दुख, पाप-पुण्य, जीवन-मरण।
  • शिवत्व जागृत कर संसार के विष को पीना होगा।

शिव तत्व का महत्व:

  • सबमें एक चेतन तत्व विराजमान है।
  • ज्ञान-भक्ति-उपासना से भरी अंजुरी आनन्द बिखेरती जाएगी।
  • सबसे जुड़ने का सहज आनन्द।
  • महाशिवरात्रि पर शिवत्व के सत्य को अपनाएं।
  • अपने जीवन को कल्याणमय बनाएं।

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