शेयर बाजार की उथल-पुथल का आम आदमी पर सीधा असर नहीं

भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट से निवेशकों का लाखों करोड़ों रुपया डूबना चिंताजनक है। इसमें हमारे आसपास शेयर मार्केट के नौकरीपेशा, छोटे व्यापारी इत्यादि लाखों रीटेल निवेशक भी शामिल हैं, जो अपनी कीमती बचत और मेहनत की कमाई को शेयर मार्केट में लगाते हैं। बहरहाल,सेंसेक्स के लगातार नीचे गिरने के कई कारण हैं जैसे टैरिफ के मुद्दे पर ट्रंप का अस्पष्ट रुख, आईटी सेक्टर के शेयरों पर दबाव, डॉलर का चढऩा और विदेशी संस्थागत निवेश यानी एफआईआई की बिकवाली का जारी रहना,रूस – यूक्रेन युद्ध, ब्रिक्स देशों और अमेरिका में टकराव, खाड़ी देशों में अशांति, अमेरिका और यूरोप में टकराव इत्यादि शामिल हैं। दरअसल, ट्रंप के बदलते बयानों ने दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर के तेज होने की आशंकाओं को हवा दे दी है।ऐसे लगता है कि इकोनॉमी के मुकाबले भारतीय बाजार अभी काफी ओवरवैल्यूड हैं और स्टॉक्स काफी महंगे हैं।इस बीच सबसे ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि बीते 4 महीनों से जारी गिरावट के चलते कई स्टॉक्स 50 प्रतिशत से ज्यादा तक गिर चुके हैं।
अनेक रिपोर्ट बताती हैं कि एक जनवरी से अब तक सभी सेक्टरों के शेयरों में कम से कम 20 से 25 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। हुआ यह है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ लगाने के ऐलान से बाजार में नकारात्मकता आई है और इसका असर शेयरों में गिरावट के तौर पर देखने को मिला है। इसके अतिरिक्त विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजारों में बिकवाली कर रहे हैं, जिससे गिरावट तेज हो रही है। अक्टूबर 2024 से विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों और बॉन्ड से 20 अरब डॉलर से ज्यादा निकाल लिए हैं। यह हाल के इतिहास में सबसे बड़ी निकासी में से एक है। इसके साथ ही अभी तक दुनिया भर में जियो पॉलिटिकल चिंताएं कम होती नहीं दिखाई देती।रूस-यूक्रेन के मोर्चे पर अनिश्चितता बनी हुई है। इस वजह से कच्चे तेल के दाम को लेकर भी आशंकाएं बरकरार हैं। इस वजह से भारतीय बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि शेयर बाजार का ये निगेटिव ट्रेंड अधिक समय बरकरार रहने वाला नहीं है। अमेरिकी नीतियों में स्थिरता आते ही, बाजार में फिर से तेजी का दौर आने लगेगा। दरअसल,ट्रंप अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में अमरीका के हित के लिए मोल-भाव , दूसरे देशों को टैरिफ से डराने में कर रहे हैं।
जाहिर है बाजार जल्दी ही रिकवर करने की स्थिति में आ जाएगा ! मार्केट में जारी इस गिरावट के बीच बाजार जानकारों ने भारतीय बाजार और शेयरों को वास्तविक कीमतों से ऊपर बताया है। अमरीकी मुद्रा की मजबूती और घरेलू शेयर बाजारों में नकारात्मक रुख ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हाल ही में ट्रंप के टैरिफ ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हुआ है। अमरीका को चीन, कनाडा और मैक्सिको द्वारा लगाए गए टैरिफ से बचना मुश्किल होगा। इससे अमरीका में मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और ब्याज दरों में वृद्धि की जा सकती है। इसका असर अमरीकी शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है, जो ट्रम्प की लोकप्रियता को प्रभावित कर सकता है।यही बात अमरीका के अरबपति निवेशक वॉरेन बफेट ने भी कही है।उन्होंने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों से अमरीका में महंगाई की स्थिति पैदा होगी और लोगों को परेशानी होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बाजार अपनी सुगमता का रास्ता ढूंढ लेता है। वैसे शेयर बाजार की उथल-पुथल का आम आदमी पर सीधा असर नहीं होता लेकिन, बाजार के रवैए से आर्थिक स्थिति का पता चलता है। कुल मिलाकर भारत के निवेशकों और सरकारी तथा अर्ध सरकारी कंपनियों को सतर्कता रखने की जरूरत है। केंद्रीय सरकार भी बाजार की नजदीकी से निगरानी करें।

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