राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल द्वारा आयोजित नॉर्थ जोन II रीजनल कॉन्फ्रेंस का देहरादून में समापन

देहरादून, 13 अप्रैल 2025: राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी, भोपाल द्वारा आयोजित नॉर्थ जोन II रीजनल कॉन्फ्रेंस का आज दिनांक 13 अप्रैल 2025 को होटल हयात सेंट्रिक, राजपुर रोड, देहरादून में सफलतापूर्वक समापन हुआ। दो दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस के अंतिम दिन माननीय उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों तथा जिला न्यायालयों के सम्मानित न्यायाधीशों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
कॉन्फ्रेंस के समापन दिवस के मुख्य आकर्षणों में ई-कोर्ट परियोजना पर विस्तृत चर्चा रही। माननीय न्यायमूर्ति श्री राजेश बिंदल ने इस परियोजना की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह न्यायालयों में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है और वर्चुअल कोर्ट के माध्यम से ऑनलाइन ट्रैफिक चालानों जैसे मामलों का तेजी से निपटारा किया जा रहा है। उन्होंने डेटा के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि वर्तमान में न्यायालयों के लगभग 5.23 करोड़ आदेश/निर्णय अपलोड हैं, जिनमें से केवल 2.18 करोड़ ही डाउनलोड किए गए हैं, जो वादियों में जागरूकता की कमी को दर्शाता है। न्यायमूर्ति बिंदल ने इस संबंध में इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

माननीय न्यायमूर्ति श्री एम. सुंदर ने वर्तमान समय में डेटा सुरक्षा को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए डेटा के किसी भी अप्रिय स्थिति में नष्ट होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने डेटा को एक से अधिक सर्वर में सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया। इस अवसर पर उन्होंने ई-सेवा के सराहनीय कार्यों की प्रशंसा की और कुछ विधिक अनुवाद करने वाले सॉफ्टवेयर के बारे में भी जानकारी दी।
माननीय न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा ने ई-सेवा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी नए सिस्टम को अपनाने में मानव स्वभावतः समय लेता है। उन्होंने त्वरित न्याय और सशक्त न्याय के महत्व पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।
माननीय न्यायमूर्ति श्री संजीव सचदेवा और श्री एम. सुंदर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से निर्णय/आदेश तैयार करने और वर्तमान तकनीक के उपयोग पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि न्यायालयों द्वारा आदेश तैयार करने में किस सीमा तक एआई की सहायता ली जा सकती है और इसमें आने वाली चुनौतियों के साथ-साथ विधिक रूप से होने वाली किसी भी हानि के लिए कौन जिम्मेदार होगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने वर्तमान में होने वाली ऑनलाइन हिंसा/दुर्व्यवहार के निपटारे के तरीकों पर भी विस्तृत जानकारी दी।

अंत में, माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड के न्यायमूर्ति श्री रविन्द्र मैठाणी जी ने अपने समापन टिप्पणी में कॉन्फ्रेंस में भाग लेने वाले माननीय उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों तथा जिला न्यायालयों के सम्मानित न्यायाधीशों का आभार व्यक्त किया। प्रतिभागियों से प्राप्त फीडबैक के साथ कॉन्फ्रेंस का सफलतापूर्वक समापन हुआ।

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