देहरादून।उत्तराखंड में पंचायत चुनावों के नतीजों के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत प्रमुखों के चयन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने अपने पर्यवेक्षकों को अलर्ट मोड पर डालते हुए संगठनात्मक रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा ने राज्यभर में नियुक्त सभी जिला पर्यवेक्षकों को निर्देशित किया है कि वे तत्काल अपने प्रभार वाले जनपदों में पहुंचकर संभावित प्रत्याशियों की रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय को भेजें। यह रिपोर्ट जिला पंचायत अध्यक्ष और क्षेत्र पंचायत प्रमुख पदों को ध्यान में रखकर तैयार की जानी है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि पर्यवेक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने प्रभार वाले जिलों में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, पूर्व सांसदों और विधानसभा चुनाव लड़ चुके नेताओं से संवाद स्थापित करें। साथ ही, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के नव निर्वाचित सदस्यों से भी बैठकें कर संभावित प्रत्याशियों का पैनल तैयार करें और उसे तत्काल प्रदेश मुख्यालय को भेजें।
आठ जिलों में कांग्रेस की मजबूत पकड़
धस्माना ने दावा किया कि प्रदेश के आठ जनपदों में कांग्रेस के जिला पंचायत अध्यक्ष पद जीतने की पूरी संभावना है, क्योंकि इन जिलों में कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों को भारी समर्थन मिला है। क्षेत्र पंचायत स्तर पर भी कांग्रेस को जबरदस्त सफलता मिली है, जिससे स्पष्ट है कि अगर चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराए गए तो उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर तय है।
भाजपा पर सत्ता दुरुपयोग का आरोप
संगठन उपाध्यक्ष धस्माना ने सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि भाजपा सत्ता, शासन, प्रशासन और धनबल के सहारे ‘जैसे-तैसे चुनाव जीतने का षड्यंत्र’ कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस इस बार पूरी सतर्कता और संगठनात्मक मजबूती के साथ मैदान में है और किसी भी तरह की राजनीतिक खरीद-फरोख्त या दबाव की राजनीति को बेनकाब किया जाएगा।
धस्माना ने यह भी कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य सिर्फ सत्ता में आना नहीं, बल्कि पंचायत स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्य और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इसके लिए संगठन पूरी गंभीरता से कार्य कर रहा है।
यह स्पष्ट संकेत है कि पंचायत चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस अब जिला पंचायत अध्यक्षों और प्रमुख पदों की लड़ाई को लेकर पूरी तरह कमर कस चुकी है। भाजपा और कांग्रेस के बीच अब असली मुकाबला संगठन की पकड़ और राजनीतिक सूझबूझ का होगा — जिसमें रणनीति की बिसात अगले कुछ दिनों में साफ होती जाएगी।

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