देहरादून/हल्द्वानी। उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में आई विनाशकारी आपदा का जायजा लेकर लौटे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने तत्काल आपदा में ध्वस्त हुए होटलों और होमस्टे की सूची जारी करने के साथ ही हताहतों व लापता लोगों के सही आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है।
करन माहरा ने कहा कि घटना को पांच दिन बीत चुके हैं, ऐसे में सरकार के पास लापता लोगों का पूरा ब्यौरा होना चाहिए। “जनता जानना चाहती है कि कितने स्थानीय निवासी, कामगार और बाहर से आए पर्यटक इस आपदा में लापता हैं,” उन्होंने कहा। माहरा ने आरोप लगाया कि सरकार ने अनुकूल कवरेज देने वाले पत्रकारों को हेलीकॉप्टर से आपदा क्षेत्र में पहुंचा दिया, जबकि सच्चाई दिखाने वाले मीडिया कर्मियों को तीन दिनों तक रोका गया।
उन्होंने याद दिलाया कि जिस दिन खीरगंगा में तबाही आई, उसी दिन हर्षिल और आसपास के इलाकों में बादल फटने से नौ से अधिक सैनिक और अन्य लोग लापता हो गए। उन्होंने रेस्क्यू कार्यों में जुटी सेना और अन्य एजेंसियों की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि प्रभावित इलाकों में न खाने-पीने की व्यवस्था है और न ही विस्थापन पर कोई ठोस निर्णय।
माहरा ने मुखवा गांव का उदाहरण देते हुए ‘घाम तापो पर्यटन’ योजना पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि जिस गांव में प्रधानमंत्री ने यह योजना शुरू की थी, वहां के लोगों ने पंचायत चुनाव का बहिष्कार किया और अब “घाम तापो बीजेपी” का नारा दे रहे हैं।
लंबा पैदल सफर और वापसी में राहत:
माहरा ने बताया कि गंगोत्री हाईवे पर लिमचागाड़ पुल से धराली की दूरी करीब 35 किलोमीटर है, और वह 50 किलोमीटर पैदल चलकर गांव पहुंचे। वापसी में उन्होंने 40–50 ऐसे लोगों को पैदल रास्ते से वापस लाया जिन्हें हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं हो सकी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा के समय भाजपा नेता राहत कार्यों के बजाय राजनीतिक कार्यक्रमों और मिठाई बांटने में व्यस्त थे।
नेता प्रतिपक्ष का आरोप – ₹5000 की राहत राशि से आहत लोग:
धराली आपदा पर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए एक गहरी त्रासदी बताया और कहा कि पीड़ितों को जीवनभर की कमाई गंवाने के बावजूद मात्र ₹5000 का चेक देकर सरकार उनके जख्मों पर नमक छिड़क रही है। आर्य ने याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय आपदा पीड़ितों को सिर्फ शपथ पत्र पर क्षति पूर्ति दी जाती थी, लेकिन मौजूदा सरकार में न राहत है और न संवेदनशीलता।
दोनों नेताओं ने मांग की है कि सरकार राहत राशि बढ़ाए, विस्थापन पर ठोस कदम उठाए और सभी आंकड़े पारदर्शिता से सार्वजनिक करे, ताकि जनता का भरोसा बहाल हो सके।

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