नई दिल्ली ,13 अगस्त (आरएनएस)। सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान को एक बार फिर भारत के कड़े रुख का सामना करना पड़ा है। पश्चिमी नदियों पर भारत द्वारा बनाई जा रही जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय के एकतरफा फैसले को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने दो टूक कहा है कि यह फैसला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं है और भारत ने इस मध्यस्थता को कभी मान्यता नहीं दी।
दरअसल, पाकिस्तान पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के एक फैसले को लेकर अपनी जीत का ढिंढोरा पीट रहा था। इस कथित फैसले में कहा गया था कि भारत को पश्चिमी नदियों (चिनाब, झेलम और सिंधु) का पानी बिना किसी रोक-टोक के पाकिस्तान के लिए बहने देना चाहिए। पाकिस्तान इसे सिंधु जल संधि (ढ्ढङ्खञ्ज) पर अपने पक्ष की पुष्टि बता रहा था।
लेकिन भारत ने पाकिस्तान की इस खुशी पर पानी फेरते हुए स्पष्ट किया है कि उसने इस मध्यस्थता न्यायालय की कार्यवाही में कभी भाग ही नहीं लिया और न ही इसके फैसले को स्वीकार करता है। भारत का मानना है कि इस विवाद के समाधान के लिए संधि के तहत ‘तटस्थ विशेषज्ञÓ की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, न कि मध्यस्थता न्यायालय की।
सूत्रों के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया है कि जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले परियोजनाओं पर लंबे समय से चल रहे विवादों के चलते वह पहले ही सिंधु जल संधि में संशोधन के लिए नोटिस जारी कर चुका है।
भारत ने विश्व बैंक द्वारा एक ही मुद्दे पर दो समानांतर प्रक्रियाएं (तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थता न्यायालय) शुरू करने के फैसले को भी कभी स्वीकार नहीं किया था। अक्टूबर 2022 में विश्व बैंक ने भारत की इस आपत्ति के बावजूद दोनों प्रक्रियाओं को एक साथ नियुक्त कर दिया था कि यह कानूनी और व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण होगा। भारत इसी विरोधाभास के कारण संधि की विवाद समाधान प्रक्रिया पर पुनर्विचार की मांग कर रहा है।
भारत ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से होने वाले सीमा पार आतंकवाद पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती। पुलवामा हमले के बाद से ही भारत ने संधि के कई प्रावधानों को स्थगित कर रखा है। एक तरफ जहां पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर संधि को पूरी तरह लागू करवाने के लिए गिड़गिड़ा रहा है, वहीं भारत ने विकास और सुरक्षा को एक साथ जोड़ते हुए पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर भारत सरकार की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जल्द ही आने की उम्मीद है।
पाकिस्तान के जीत के जश्न पर फिरा पानी, सिंधु जल विवाद पर भारत ने एकतरफा फैसला किया खारिज
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