
विकासनगर(आरएनएस)। परिसीमन के तहत विकासनगर ब्लॉक की दो ग्राम पंचायतों को नगर निकाय का हिस्सा बनाया गया था, लेकिन आठ साल बाद भी इन ग्राम सभाओं की जमीन और परिसंपत्तियां नगर पालिका में हस्तांतरित नहीं हो पाई है। इस कारण नगर पालिका को इन दोनों नए वार्डों में विकास कार्य कराने के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। दरअसल, पहले नगर पालिका विकासनगर में नौ वार्ड थे। आठ साल पहले दो ग्राम पंचायतों बाबूगढ और रसूलपुर पंचायत को विकासनगर नगर पालिका में शामिल किया गया था। जिसके बाद पालिका में वार्डों की संख्या ग्यारह हो गई है। इसके बाद पालिका में इन वार्डों के लोगों ने दो बार अध्यक्ष और सभासद भी चुन लिए।
वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल भी लगभग छह माह पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक नगर पालिका में शामिल हुए ग्राम पंचायतों के भूमि हस्तानांरण के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अभी तक पालिका प्रशासन के पास गांवों में सरकारी जमीन का कोई आंकड़ा ही नहीं है। प्रत्येक पंचायत में कुछ जमीन ग्राम समाज की होती है, जिस पर नियंत्रण राज्य सरकार का होता है। निकाय में शामिल होने के बाद ऐसी जमीन निकाय प्रशासन के स्वामित्व में आ जाती हैं, लेकिन बाबूगढ़ और रसूलपुर जैसी बड़ी पंचायतें निकाय में शामिल होने के बाद निकाय प्रशासन को तत्कालीन ग्राम समाज की जमीन नहीं सौंपी गई। नगर पालिका को तत्कालीन ग्राम समाज की जमीन की कोई जानकारी ही नहीं है। ऐसे में इन जमीनों पर कब्जे की संभावना तो है ही साथ ही इससे नगर पालिका के विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। निकाय को इन क्षेत्रों में निर्माण के लिए जमीन नहीं मिल रही है। खासकर पार्क, पेयजल टैंक, वाहनों की पार्किंग के लिए जगह नहीं मिल रही है। जबकि, पालिका प्रशासन लगातर इस संबंध में जिला प्रशासन से पत्राचार कर रहा है। एक बार फिर से पालिका प्रशासन ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर जमीन हस्तांतरित करने की मांग की है।
परिसीमन के बाद निकाय में दो ग्राम पंचायतें शामिल की गईं, लेकिन उन पंचायतों का खसरा नंबर, उनकी परिसंपत्तियों की कोई जानकारी नहीं दी गई। सिर्फ सीमांकन के आधार पर पंचायतों को निकाय के हवाले किया गया। कई बार प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। लेकिन अभी तक जमीन हस्तांतरण के लिए कोई कार्रवाई नहीं हुई है। – बीपी भट्ट, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका विकासनगर

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