
वाशिंगटन,02 सितंबर। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो एक बार फिर रूस और भारत के व्यापारिक संबंधों की आलोचना की है। उन्होंने चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा कि भारत को रूस के साथ नहीं बल्कि अमेरिका के साथ रहने की जरूरत है।
पीटर नवारो ने पत्रकारों से कहा, प्रधानमंत्री मोदी को इस मामले में यूरोप और यूक्रेन में हमारे साथ होना चाहिए, न कि रूस के साथ, और उन्हें तेल खरीदना बंद करना चाहिए। शांति का मार्ग कई मायनों में कम से कम आंशिक रूप से नई दिल्ली से होकर गुजरता है। अब समय आ गया है कि मोदी आगे आएं। मैं मोदी का बहुत सम्मान करता हूँ। मैं भारतीय लोगों से प्यार करता हूं।
नवारो ने चीन के साथ भारत के शत्रुतापूर्ण इतिहास और दिल्ली की रणनीति की ओर इशारा करते हुए आगे कहा, मोदी को दुनिया के 2 सबसे बड़े तानाशाह पुतिन और शी जिनपिंग के साथ मिलते देखना शर्मनाक है। इसका कोई मतलब नहीं है। मुझे यकीन नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी क्या सोच रहे हैं, खासकर तब जब भारत दशकों से चीन के साथ शीत युद्ध और कभी-कभी गर्म युद्ध में रहा है।
नवारों का बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है और रूस के साथ तेल व्यापार को लेकर चिढ़ा हुआ है। इससे पहले नवारों भारत को टैरिफ का महाराजा कह चुके हैं और कहा था कि रूस से तेल खरीदकर भारत मुनाफाखोरी में लगा है। उन्होंने यूक्रेन युद्ध को मोदी का युद्ध और भारत को रूस का धोबीघाट कहा था। उन्होंने कहा था, ब्राह्मण भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं।
एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय एकीकरण के महत्व पर ज़ोर दिया और सदस्यों से व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने का आग्रह किया। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने इस संगठन की रणनीतिक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि एससीओ वार्ता एक नए यूरेशियाई सुरक्षा ढाँचे की नींव रख रही है। चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 25वीं बैठक को संबोधित कर एससीओ से निष्पक्षता-न्याय के लिए एक आधार के रूप में कार्य करने का आह्वान किया।

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