सरकारी जमीन, माफिया का राज।

शिमला बाईपास से परवल: भूमाफिया का सरकारी जमीन पर तांडव, आम का बगीचा तबाह!

देहरादून। देहरादून के शिमला बाईपास रोड से परवल की ओर बढ़ते ही एक ऐसी साजिश सामने आती है, जो न सिर्फ सरकारी जमीन को निगल रही है, बल्कि शहर की प्राकृतिक धरोहर को भी खतरे में डाल रही है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि भूमाफियाओं ने लगभग 70 बीघा सरकारी भूमि पर अवैध प्लाटिंग कर दी है। ये भू-माफिया भोले-भाले लोगों को झूठे दस्तावेज दिखाकर जमीन बेच देते हैं और फरार हो जाते हैं, जिसके बाद मासूम खरीदार कानूनी पचड़े में फंसकर सब कुछ गंवा बैठते हैं। सवाल यह है कि क्या मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) और राज्य सरकार इस खतरे को रोक पाएंगे, या देहरादून की हरियाली हमेशा के लिए मिट्टी में मिल जाएगी?

सूत्रों के अनुसार, ये भूमाफिया नदी की सरकारी जमीन, जिसके खसरा नंबर 994, 987, 976, 974, और 975 हैं, पर न केवल अवैध प्लाटिंग कर रहे हैं, बल्कि धड़ल्ले से इसकी रजिस्ट्री भी करवा चुके हैं। नदी को छोटा करके इन भूमाफियाओं ने सरकारी जमीन पर प्लाटिंग की और फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करवा दी, जबकि ये खसरा नंबर पूर्ण रूप से सरकारी हैं। यह एक गंभीर जांच का विषय है। सरकार को तुरंत इसकी गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करना चाहिए, ताकि सच्चाई उजागर हो। इन अवैध रजिस्ट्रियों को रद्द करते हुए प्लाटिंग को तत्काल ध्वस्त करना चाहिए और सरकारी जमीन पर कब्जा वापस लेना चाहिए। इनका तरीका बेहद चालाकी भरा है: कोई स्थायी ऑफिस नहीं, खरीदारों को लग्जरी गाड़ियों में साइट दिखाकर झूठे वादे किए जाते हैं और सौदा पक्का कर लिया जाता है। एक स्थानीय ने बताया, “ये लोग रात के अंधेरे में पेड़ काटते हैं और प्लाटिंग को बढ़ावा देते हैं। अगर यही चला, तो ये इलाका कंक्रीट का जंगल बन जाएगा।”

आम का बगीचा खतरे में: भूमाफिया ने शुरू किया पेड़ों का कत्लेआम
इस इलाके में प्रवेश करते समय एक आम का बगीचा नजर आता है, जो देहरादून की हरियाली का हिस्सा है। लेकिन खबर है कि भूमाफिया इस बगीचे को भी निशाना बना रहे हैं। कुछ पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं, और बाकी पेड़ों को काटने की पूरी तैयारी है। सूत्रों का कहना है कि भूमाफिया इसे किसी और खसरा नंबर में दिखाकर खरीदारों को गुमराह कर रहे हैं। यह सिर्फ जमीन हड़पने की साजिश नहीं, बल्कि पर्यावरण के खिलाफ अपराध है। देहरादून जैसे संवेदनशील पारिस्थितिकी वाले क्षेत्र में पेड़ों की कटाई भूस्खलन, बाढ़ और जलवायु परिवर्तन के जोखिम को बढ़ा सकती है।

सरकारी नियम क्या कहते हैं?

उत्तराखंड सरकार के नियमों के अनुसार, सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण और वृक्ष कटाई सख्त अपराध है। उत्तराखंड भू-कानून के तहत, सरकारी भूमि पर बिना MDDA या संबंधित प्राधिकरण की अनुमति के प्लाटिंग या निर्माण अवैध है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2023 में अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश दिए थे, जिसमें नाकाम अधिकारियों पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही गई थी। इसके अलावा, ‘उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 1976’ (उत्तराखंड में लागू) के सेक्शन 4 के तहत, सरकारी या वन भूमि पर पेड़ काटने के लिए वन अधिकारी से अनुमति जरूरी है। उल्लंघन पर 6 महीने की कैद, 1,000 रुपये जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।हर कटे पेड़ के बदले दो नए पेड़ लगाने का नियम भी है।अगर पेड़ खतरा पैदा कर रहा हो, तो तत्काल कार्रवाई की छूट है, लेकिन प्लाटिंग के लिए कटाई पूरी तरह गैरकानूनी है।

MDDA की कार्रवाई: कागजों में सख्ती, हकीकत में ढील?
MDDA के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने अवैध प्लाटिंग को तत्काल ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं। 2025 में MDDA ने शिमला बाईपास पर 30 बीघा अवैध प्लाटिंग तोड़ी, जबकि अगस्त में शेरपुर (शिमला बाईपास) में 15 बीघा और सेलाकुई में 10 बीघा जमीन साफ की।सितंबर में कुल 150 बीघा अवैध प्लाटिंग ध्वस्त की गई, जिसमें शिमला बाईपास शामिल है।MDDA ने लोगों से अपील की है कि प्लॉट खरीदने से पहले वैधता की जांच करें। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये कार्रवाइयां काफी हैं? सूत्रों का कहना है कि कुछ भूमाफिया राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाते हैं, जिसके चलते प्लाटिंग दोबारा शुरू हो जाती है।

सरकार के सामने चुनौती: कब तक चुप्पी?
अगर भूमाफियाओं का यह तांडव यूं ही चला, तो सरकार के पास जवाब नहीं बचेगा। देहरादून में कृषि और बागवानी भूमि तेजी से सिकुड़ रही है, और उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 2018 में ही कृषि भूमि पर ग्रुप हाउसिंग पर रोक लगाई थी। फिर भी, जमीनी हकीकत नहीं बदली। सरकार को तुरंत SIT गठित करनी चाहिए, जिसमें वन विभाग, पुलिस और राजस्व अधिकारी शामिल हों। राजनीतिक प्रभाव की परवाह किए बिना दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। आम के बगीचे को बचाने के लिए तत्काल वन विभाग को सर्वे करना चाहिए और कटे पेड़ों की जांच कर जिम्मेदारों को सजा देनी चाहिए।

हमारी चौपाल टीम जमीन खरीदारों से अपील करता है कि प्लॉट खरीदने से पहले MDDA से वैधता जांच लें, वरना आप भी भूमाफिया का शिकार बन सकते हैं।

सरकार, जागिए ! देहरादून की हरीतिमा बचाना आपकी जिम्मेदारी है, वरना इतिहास आपको माफ नहीं करेगा।

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