
देहरादून। राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) ने आयुष्मान योजनाओं के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए देहरादून के ओजस्वी और अरिहंत अस्पताल तथा बरेली स्थित एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज की संबद्धता निलंबित कर दी है। यह कार्रवाई लाभार्थियों को कैशलेस इलाज से वंचित करने, अवैध वसूली और स्वास्थ्य मानकों में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद की गई।
प्राधिकरण के अनुसार, जांच में सामने आया कि कई अस्पताल योजना के तहत आने वाले मरीजों को या तो भर्ती नहीं कर रहे थे या फिर उनसे इलाज के नाम पर पैसे वसूल रहे थे। ओजस्वी अस्पताल में एक लाभार्थी से 12 हजार रुपये लिए जाने का मामला सामने आया, जो योजना के नियमों का उल्लंघन है। बाद में राशि लौटाने का दावा किया गया, लेकिन यह कार्रवाई शिकायत के बाद की गई। इस मामले में अस्पताल पर 60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन को 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (आरएमओ) की उपलब्धता भी अपर्याप्त पाई गई। एचईएम पोर्टल पर दर्ज चिकित्सक का संपर्क नंबर सक्रिय नहीं मिला और निरीक्षण के समय संबंधित चिकित्सक मौजूद नहीं थे। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर डी-एम्पैनलमेंट सहित अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है।
इसी तरह, बरेली के एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने उत्तराखंड से रेफर होकर पहुंचे मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया। कई मामलों में वैध रेफरल पत्रों को भी स्वीकार नहीं किया गया। शिकायतों में यह भी सामने आया कि कुछ मरीजों से इलाज के नाम पर बड़ी रकम वसूली गई। अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है और फिलहाल उसकी संबद्धता निलंबित कर दी गई है।
देहरादून के अरिहंत अस्पताल में डायलिसिस यूनिट और संक्रमण नियंत्रण से जुड़ी गंभीर खामियां पाई गईं। निरीक्षण में पाया गया कि न तो पर्याप्त चिकित्सकीय निगरानी थी और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था। इस पर तत्काल प्रभाव से अस्पताल की सेवाओं को योजना से बाहर कर दिया गया है।
वहीं, बलूनी अस्पताल पर भी कार्रवाई करते हुए 86,250 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। अस्पताल पर आरोप है कि उसने एक आयुष्मान मरीज से दवाइयों और जांच के नाम पर रकम वसूली, जिसका संतोषजनक प्रमाण भी प्रस्तुत नहीं किया जा सका। निरीक्षण में अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं और साफ-सफाई व्यवस्था में भी कमियां मिलीं। अस्पताल को 15 दिनों के भीतर सभी खामियां दूर करने की चेतावनी दी गई है।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण (एसएचए) ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के अधिकारों से समझौता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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