लद्दाख आंदोलन पर SKM का हस्तक्षेप, वांगचुक की रिहाई और राज्यत्व की मांग को दोहराया

नई दिल्ली, 28 सितम्बर। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने लद्दाख में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल सोनम वांगचुक को रिहा करने, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) वापस लेने, और लद्दाख को राज्य का दर्जा व छठी अनुसूची के अधिकार देने की मांग की है।

SKM ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर लद्दाख के लोगों के जन-आंदोलन के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता व्यक्त की है। मोर्चा ने कहा कि लद्दाख के लोग पिछले पांच साल से शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और सोनम वांगचुक जैसे “महान देशभक्त” पर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा जैसे आरोप “अराजनीतिक और दुर्भावनापूर्ण” हैं।

प्रेस विज्ञप्ति में सरकार पर हिंसा के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा गया, “गृह मंत्रालय ने 24 सितंबर की हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि यह तथ्य पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है कि वह 10 सितंबर से भूख हड़ताल पर थे। आग में घी डालने का काम सरकार ने स्वयं किया, जब उसने समय रहते मुद्दों पर चर्चा से इनकार कर दिया और बातचीत की तारीख 6 अक्टूबर तय की।”

SKM ने लद्दाख में हुई पुलिस फायरिंग की न्यायिक जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आह्वान किया है। उनके अनुसार, नियमों के विपरीत, मृतकों के शवों के सीने और सिर में कई गोलियां लगी मिली हैं, जो पुलिस की ज्यादती को दर्शाता है।

मोर्चा ने लद्दाख में बढ़ती बेरोजगारी को संकट का प्रमुख कारण बताया। राज्यसभा में दिसंबर 2024 में पेश आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि लद्दाख में स्नातकों की बेरोजगारी दर 2021-22 के 9.8% से बढ़कर 2022-23 में 26.5% हो गई, जो राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है। हाल में 534 पदों के लिए 50,000 आवेदन मिलना इस गंभीर समस्या को उजागर करता है।

SKM ने आरोप लगाया कि गृह मंत्रालय स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी करके अडानी, अंबानी और टाटा जैसे कॉर्पोरेट घरानों को लद्दाख की जमीन, झीलों और जंगलों को खनन और पर्यटन के लिए सौंपने में लगा हुआ है। यह नीति स्थानीय लोगों के पशुपालन, कृषि और मछलीपालन जैसे पारंपरिक जीवनयापन के स्रोतों को नष्ट कर देगी।

प्रेस विज्ञप्ति के अंत में, SKM ने देश की सभी राजनीतिक पार्टियों और जनआंदोलनों से अपील की कि वे लद्दाख के लोगों के इस जायज संघर्ष के समर्थन में आवाज उठाएं और मोदी सरकार की “असंवेदनशील और खतरनाक” नीतियों के खिलाफ एकजुट हों।

ऐसी और भी खबरें पढ़ने के लिए बने रहें merouttarakhand.in के साथ।
Subscribe our Whatsapp Channel
Like Our Facebook & Instagram Page
RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments