आदि गौरव महोत्सव के दूसरे दिन उत्तराखंड की जनजातीय धरोहर रही मुख्य आकर्षण

रोहित चौहान, विवेक नौटियाल, नरेश बादशाह, रिंकू राणा और पद्मश्री बसंती बिष्ट ने शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम में दी प्रस्तुति

देहरादून।आदि गौरव महोत्सव 2025 के दूसरे दिन रेंजर्स ग्राउंड में उत्तराखंड की जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया। आगंतुकों ने विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया और पारंपरिक उत्पादों की विस्तृत प्रदर्शनी को भी देखा। दिन का मुख्य आकर्षण शाम का सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा, जिसमें उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक कलाकार—रोहित चौहान, विवेक नौटियाल, नरेश बादशाह, रिंकू राणा और पद्मश्री बसंती बिष्ट—ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

राज्य जनजातीय शोध संस्थान (टी.आर.आई) के निदेशक संजय सिंह टोलिया कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की।

राज्य जनजातीय शोध संस्थान (टी.आर.आई), उत्तराखंड, देहरादून द्वारा आयोजित तीन दिवसीय इस महोत्सव में प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक प्रदर्शनियां लगाई जा रही हैं। दूसरे दिन उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों के जनजातीय कलाकारों ने भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रदर्शनी में हैंडीक्राफ्ट्स, काष्ठ कला, होम डेकोर सामग्री और विभिन्न पहाड़ी मिलेट्स ने आगंतुकों का ध्यान आकर्षित किया।

टीआरआई उत्तराखंड के अतिरिक्त निदेशक योगेंद्र रावत ने कहा, “ऐसे आयोजन समुदायों के बीच की दूरी को कम करते हैं और पारंपरिक कला रूपों को संजोने में मदद करते हैं। हमारा उद्देश्य जनजातीय कारीगरों को वह पहचान और सम्मान दिलाना है जिसके वे हकदार हैं, और यह महोत्सव उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम में जौंसारी, भोटिया, बुक्सा, थारू और राजी समुदायों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को उत्तराखंड की जनजातीय विविधता की झलक दिखाई।

संगीतमय शाम की शुरुआत लोकप्रिय गायक रोहित चौहान ने ‘नांदरे तू’, ‘मेरी बथीना’ और ‘तेरा नखरा’ जैसे गीतों से की। नरेश बादशाह ने ‘शिव कैलाशों के वासी’ और ‘दर्शनीय’ जैसे गीतों से माहौल को जोश से भर दिया। पद्मश्री बसंती बिष्ट ने ‘बाजा हुड़की’ और ‘देवरा जा रे तू’ जैसे जगारों से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। रिंकू राणा ने पहाड़ की लोकधुनों से भरपूर गीत प्रस्तुत किए, जबकि विवेक नौटियाल के गीतों ने हर आयु वर्ग के दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। सभी कलाकारों ने मिलकर उत्तराखंड की समृद्ध संगीत परंपरा से भरी यादगार शाम बनाई।

एक आगंतुक सुप्रिया रावत ने कहा, “यहां एक ही जगह पर इतनी जनजातीय परंपराओं को देखना बहुत अच्छा लगा। इन्हें करीब से समझने का यह एक अद्भुत अवसर है।”

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में टीआरआई निदेशक एस. एस. टोलिया, अतिरिक्त निदेशक योगेंद्र रावत, टीआरआई समन्वयक राजीव कुमार सोलंकी और सामाजिक कल्याण विभाग उत्तराखंड के सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अददंकी शामिल रहे।

महोत्सव का समापन 17 नवंबर को प्रियंका मेहर, जितेंद्र तोमक्याल, ललित गित्यार, हारू, कनिका बहुगुणा और हर्षिता कोली के प्रस्तुतियों के साथ होगा।

आदि गौरव महोत्सव, टीआरआई उत्तराखंड की पहल है, जिसका उद्देश्य जनजातीय समुदायों की कला, संस्कृति और जीवनशैली को व्यापक पहचान दिलाना है I

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