UPES में ICAMEES 2.0 का आयोजन, सतत तकनीकों को आकार देने के लिए 200+ शोधकर्ता हुए एकजुट

देहरादून। UPES ने 18–19 दिसंबर 2025 को द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन – एडवांस्ड मटीरियल्स, एनर्जी एंड एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी (ICAMEES 2.0) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस सम्मेलन में भारत और विदेशों से आए अग्रणी वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, छात्रों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया और सतत भविष्य को आकार देने वाले महत्वपूर्ण वैज्ञानिक विकासों पर विचार-विमर्श किया।
अंतरविषयक संवाद के एक वैश्विक मंच के रूप में परिकल्पित ICAMEES 2.0 में 200 से अधिक प्रतिनिधियों की भागीदारी देखने को मिली। सम्मेलन के दौरान कीनोट व्याख्यान, आमंत्रित वक्तव्य, मौखिक प्रस्तुतियाँ और पोस्टर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें सामग्री विज्ञान, ऊर्जा प्रौद्योगिकियों और पर्यावरणीय सततता से जुड़े उभरते और उन्नत विषयों पर चर्चा हुई।

सम्मेलन का उद्घाटन डॉ. लोक प्रताप सिंह, महानिदेशक, नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मैटीरियल्स (NCCBM), नई दिल्ली, द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में किया गया। पद्म श्री प्रो. एस. शिवराम, एफएनए, मानद प्रोफेसर एमेरिटस, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER), कोलकाता, एवं जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बेंगलुरु, ने सम्मेलन के मुख्य संरक्षक के रूप में मार्गदर्शन दिया। वहीं, मैग्सेसे पुरस्कार विजेता श्री राजेंद्र सिंह सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि रहे।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. राम शर्मा, कुलपति, UPES, ने कहा, “आज हम जिन सततता से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वे इतनी व्यापक और तात्कालिक हैं कि किसी एक विषय के लिए उन्हें अकेले सुलझाना संभव नहीं है। शोध अब अलग-थलग खांचों में सीमित नहीं रह सकता और न ही केवल काग़ज़ों तक। उसे वास्तविक समाधानों में बदलना होगा, जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाएँ। ICAMEES 2.0 के माध्यम से हम ऐसा ही एक मंच तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं, जहाँ वैज्ञानिक, उद्योग जगत के नेता और शोध संगठन आपस में संवाद करें, एक-दूसरे से सवाल पूछें और मिलकर समाधान विकसित करें। ऐसे ईमानदार और अंतरविषयक संवाद के माध्यम से ही हम सामग्री, ऊर्जा और पर्यावरणीय अनुसंधान की सीमाओं को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा सकते हैं।”

दो दिवसीय ICAMEES 2.0 में तीन प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया—एडवांस्ड मटीरियल्स, जिसमें उन्नत कार्यात्मक सामग्री, नैनोमटीरियल्स, पॉलिमेरिक एवं बायोमटीरियल्स, सेमीकंडक्टर्स, फोटोनिक एवं सुप्रामॉलिक्यूलर मटीरियल्स, पाईजो एवं ट्राइबो-इलेक्ट्रिक मटीरियल्स तथा कैटलिस्ट्स शामिल रहे; ऊर्जा, जिसमें ऊर्जा संचयन एवं भंडारण, नवीकरणीय एवं पारंपरिक ऊर्जा संसाधन, सुपरकैपेसिटर, बैटरियाँ, वैकल्पिक एवं हाइब्रिड ऊर्जा प्रणालियाँ तथा ऊर्जा रूपांतरण प्रौद्योगिकियाँ शामिल थीं; और पर्यावरणीय सततता, जिसमें ग्रीन केमिस्ट्री, अपशिष्ट प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएँ, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरणीय प्रदूषण की निगरानी एवं उपचार, तथा कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

सम्मेलन का उद्देश्य हालिया वैज्ञानिक प्रगति का दस्तावेजीकरण, अकादमिक जगत, उद्योग और अनुसंधान एवं विकास संगठनों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना, तथा राष्ट्रीय और वैश्विक सततता लक्ष्यों के अनुरूप अंतरविषयक सहयोग को प्रोत्साहित करना रहा।
ICAMEES 2.0 ने युवा शोधकर्ताओं और छात्रों को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने, वरिष्ठ वैज्ञानिकों से संवाद करने और उभरते अनुसंधान क्षेत्रों को समझने का एक सशक्त मंच प्रदान किया। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में सहयोगात्मक अनुसंधान, भविष्य की परियोजना साझेदारियों और ट्रांसलेशनल अवसरों पर सार्थक चर्चाएँ हुईं, जिससे संस्थानों और क्षेत्रों के बीच सहयोग को मजबूती मिली।

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