हिंदू धर्म में माघ पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक शुद्धि और भगवान विष्णु की आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वर्ष 2026 में 1 फरवरी की रात्रि से प्रारंभ होकर 2 फरवरी तक चलने वाले माघ पूर्णिमा के इस पर्व पर दान, स्नान और पूजन का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन यदि विधि-विधान से लक्ष्मी-नारायण की पूजा की जाए, तो घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। अगर आप माघ पूर्णिमा के दिन श्री हरि को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो अपनी पूजा की थाली में ये चीजें शामिल करना न भूलें।
श्री हरि की विशेष पूजा सामग्री लिस्ट
पीले पुष्प और फल
श्रीहरि को पीले गेंदे के फूल या पीले कन्नेर के फूल बहुत प्रिय हैं। साथ ही भोग के लिए केले और पीले रंग की मिठाई बेसन के लड्डू या केसरिया हलवा रखें।
तुलसी दल
विष्णु पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। ध्यान रहे कि पूर्णिमा के दिन तुलसी न तोड़ें, एक दिन पहले तोड़कर रखा हुआ तुलसी दल ही अर्पित करें।
गंगाजल और पंचामृत
भगवान के अभिषेक के लिए शुद्ध गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर का मिश्रण (पंचामृत) तैयार रखें।
पीला चंदन और अक्षत
माथे पर तिलक लगाने और भगवान को अर्पित करने के लिए पीला चंदन रखें। अक्षत अखंडित होने चाहिए।
धूप, दीप और कपूर
आरती के लिए शुद्ध घी का दीपक और उत्तम सुगंध वाली धूपबत्ती रखें। कपूर से आरती करने पर घर की नकारात्मकता दूर होती है।
सुपारी और कलावा
गणेश पूजन और संकल्प के लिए साबुत सुपारी और कलावा अनिवार्य है।
सत्यनारायण कथा पुस्तक
माघ पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा पढ़ना विशेष फलदायी होता है।
पूजन की विधि
सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर पर गंगाजल डालकर स्नान करें।
मंदिर की सफाई कर पीले रंग का वस्त्र बिछाएं और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
उपरोक्त सामग्री से पूजन करें और अंत में विष्णु सहस्रनाम या सत्यनारायण कथा का पाठ करें। जरूरतमंदों को तिल, गुड़ और अन्न का दान करें।
जरूरतमंदों को तिल, गुड़ और अन्न का दान करें।
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