देहरादून। देश को नेतृत्व देने वाले सैन्य अफसरों की नर्सरी मानी जाने वाली इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) देहरादून में औपनिवेशिक विरासत के नामों को हटाकर राष्ट्रवीरों के सम्मान की नई परंपरा शुरू की गई है। ब्रिटिश काल की पहचान वाले भवनों और स्थलों के नाम बदलकर अब उन्हें भारत की सैन्य गौरवगाथा से जोड़ा जा रहा है, ताकि भावी अफसर हर कदम पर शौर्य, बलिदान और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा ले सकें।
IMA परिसर में स्थित कोलिन्स ब्लॉक (Collins Block) का नाम बदलकर अब ‘नुब्रा ब्लॉक’ (Nubra Block) कर दिया गया है। लद्दाख की रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण नुब्रा घाटी के नाम पर रखा गया यह भवन सीमाओं की रक्षा और सैनिकों के अदम्य साहस की याद दिलाएगा।
इसी तरह किंग्सवे ब्लॉक (Kingsway Block) अब ‘कारगिल ब्लॉक’ (Kargil Block) कहलाएगा, जो 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की ऐतिहासिक विजय और वीरता का प्रतीक बनेगा।
246 स्थानों के नाम बदले, गुलामी की पहचान समाप्त
IMA में हुए इस बदलाव के साथ-साथ भारतीय सेना ने देशभर में एक व्यापक नामकरण अभियान भी चलाया है। सेना के अनुसार अब तक 246 सड़कों, इमारतों, कॉलोनियों और सैन्य सुविधाओं के नाम बदले जा चुके हैं, जो पहले अंग्रेज अफसरों या ब्रिटिश शासन से जुड़े थे।
सेना के अधिकारियों का कहना है कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘पंच प्रण’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और भारत की सैन्य विरासत को सम्मान देना है।
बदले गए नामों का विवरण इस प्रकार है—
124 सड़कें: कैंटोनमेंट क्षेत्रों की प्रमुख सड़कें
77 कॉलोनियां: सैनिकों और अधिकारियों के आवासीय क्षेत्र
27 इमारतें: मुख्यालय और सैन्य ढांचे
18 अन्य सुविधाएं: पार्क, प्रशिक्षण क्षेत्र, खेल मैदान, गेट और हेलीपैड
देशभर में वीरों को मिला सम्मान
दिल्ली कैंट की माल रोड अब ‘शहीद अरुण खेत्रपाल मार्ग’
कोलकाता का ऐतिहासिक फोर्ट विलियम अब ‘विजय दुर्ग’
मथुरा कैंट की न्यू हॉर्न लाइन अब ‘अब्दुल हमीद लाइन्स’
मऊ (महू) की मैल्कम लाइन्स अब ‘पीरू सिंह लाइन्स’
जयपुर कैंट की क्वींस रोड अब ‘सुंदर सिंह मार्ग’
सेना का मानना है कि IMA जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में यह बदलाव केवल नामकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भावी अफसरों के मन में राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और बलिदान के संस्कार मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अब कैडेट्स उन इमारतों और सड़कों पर कदमताल करेंगे, जिनके नाम भारत के युद्ध नायकों और परमवीर चक्र विजेताओं की वीरता की अमर गाथाएं कहते हैं।

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