स्कूल बस हादसे पर बाल अधिकार आयोग का सख्त रुख

ऊधम सिंह नगर के आनंद पब्लिक स्कूल मामले में स्वतः संज्ञान, 8 लाख की सहायता दिलाई; परिवहन सुरक्षा मानकों पर कड़ा निर्देश

ऊधम सिंह नगर। जनपद ऊधम सिंह नगर स्थित आनंद पब्लिक स्कूल में स्कूल बस से जुड़े एक दर्दनाक हादसे में बालक की मृत्यु के मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त कार्रवाई की है। आयोग ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे बाल अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन माना और पीड़ित परिवार तथा विद्यालय प्रबंधन दोनों को तलब कर विस्तृत सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घटना के बाद विद्यालय प्रबंधन द्वारा पीड़ित परिवार के प्रति प्रारंभिक स्तर पर अपेक्षित संवेदनशीलता और ठोस सहायता का अभाव रहा। आयोग ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं में संस्थागत जिम्मेदारी तय होना अनिवार्य है। आयोग के हस्तक्षेप और निर्देशों के बाद विद्यालय प्रबंधन ने पीड़ित परिवार को ₹8 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी आर्थिक सहायता से एक बच्चे के जीवन की क्षति की भरपाई संभव नहीं है, किंतु लापरवाही के मामलों में जवाबदेही तय करना और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। आयोग ने यह भी संकेत दिया कि यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई तो संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कठोर कदम उठाए जाएंगे।

हाल के समय में प्रदेश में स्कूल परिवहन से जुड़े कई मामलों को देखते हुए आयोग ने व्यापक स्तर पर भी पहल की है। आयोग ने परिवहन विभाग को निर्देश जारी कर कहा है कि स्कूल बसों और अन्य परिवहन वाहनों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। फिटनेस प्रमाणपत्र, चालक की पात्रता, बसों में परिचालक की उपलब्धता, आपातकालीन निकास, सीसीटीवी व्यवस्था और जीपीएस सिस्टम जैसे मानकों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए।

आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दोहराया कि बच्चों के जीवन, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए वह पूर्णतः प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोरतम कार्रवाई जारी रखी जाएगी।

इस प्रकरण ने एक बार फिर स्कूल परिवहन व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना के बाद स्कूलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने की मांग उठाई है।

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