देहरादून। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी संयुक्त समिति के केंद्रीय मुख्य संरक्षक एवं कांग्रेस प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने उत्तराखंड पुलिस भर्ती परीक्षा में राज्य आंदोलनकारियों के बच्चों के रिजल्ट रोकने की राज्य सरकार की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे आंदोलनकारियों के आश्रितों के प्रति प्रताड़ना करार देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रताप ने कहा कि वर्षों के कठिन संघर्ष के बाद राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिलवाने में सफलता मिली थी, लेकिन अब चयनित हुए इन बच्चों का रिजल्ट रोककर उनका भविष्य अधर में लटका दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आरक्षण उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों व योगदानकर्ताओं के बच्चों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने का प्रावधान है, जो अब सरकार की उदासीनता से प्रभावित हो रहा है। “ये बच्चे आंदोलन की विरासत हैं, इन्हें प्रताड़ित करना राज्य आंदोलन के अपमान के समान है,” प्रताप ने कहा।
कांग्रेस प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री से अपील की कि वे व्यक्तिगत रूप से इस मामले में हस्तक्षेप करें, चयनित अभ्यर्थियों का रिजल्ट तुरंत जारी करें और उन्हें पुलिस सेवा में समाहित कर उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलनकारी संगठन सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।
यह विवाद पुलिस भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद उभरा है, जहां कई आंदोलनकारी आश्रितों ने आरक्षण कोटे में सफलता हासिल की थी। सरकार पर अब पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि इससे युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

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