देहरादून। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं विधायक काजी निजामुद्दीन ने प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए मानव विकास सूचकांक और आर्थिकी के आंकड़ों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें ‘झूठ का पुलिंदा’ करार दिया है। आज आयोजित एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार जनता के सामने सच रखने से कतरा रही है, जबकि धरातल पर स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक न्याय की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
काजी निजामुद्दीन ने गृह मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से सरकार को घेरते हुए कहा कि उत्तराखंड में जन्म के समय लिंगानुपात की स्थिति देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे दयनीय है। राज्य में प्रति 1000 पुरुषों पर केवल 868 महिलाएं हैं। उन्होंने सवाल किया कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली सरकार इन सरकारी आंकड़ों को कैसे झुठला सकती है?
शिक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए उन्होंने सदन में पेश आंकड़ों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार (2016-17) के समय राज्य में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 12,601 थी, जो 2025 में घटकर 11,116 रह गई है। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। कुल मिलाकर 2017 से अब तक राज्य में 1,735 स्कूल कम हुए हैं, जो शिक्षा के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।

काजी ने कहा कि राज्य में बेरोजगारी के साथ-साथ ‘अधरोजगारी’ (Underemployment) एक बड़ा संकट बन गई है, जहाँ शिक्षित युवा चपरासी जैसे पदों पर काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने उद्योगों के पलायन पर डेटा पेश करते हुए कहा कि पिछले 10 वर्षों में राज्य में फैक्ट्रियों की संख्या 2,987 से घटकर 2,897 रह गई है। 10 चीनी मिलों में से अब केवल 7 ही बची हैं। उन्होंने प्रति व्यक्ति आय के आंकड़ों को शहरी क्षेत्रों का छलावा बताया और कहा कि पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और खानपुर जैसे क्षेत्रों में असलियत इससे कोसों दूर है।
सरकार की वित्तीय स्थिति पर प्रहार करते हुए विधायक ने कहा कि 2017 में राज्य पर जो कर्ज 44,508 करोड़ था, वह अब 144 प्रतिशत बढ़कर 1,08,527 करोड़ रुपये हो गया है। बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा केवल ब्याज और लोन चुकाने में जा रहा है। स्वास्थ्य के मोर्चे पर उन्होंने कैग (CAG) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के 59 प्रतिशत बच्चे एनीमिया और 27 प्रतिशत कुपोषण के शिकार हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 94 प्रतिशत विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद रिक्त पड़े हैं।

अंत में, उन्होंने बजट सत्र की अवधि पर सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा नियमावली के अनुसार बजट पर कम से कम 20-25 दिन चर्चा होनी चाहिए, लेकिन सरकार मात्र 4 दिन का सत्र आहूत कर खानापूर्ति कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के सवालों से बचने के लिए सरकार चर्चा से भाग रही है और गैरसैण जैसे महत्वपूर्ण स्थान की अवहेलना कर रही है।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, सोशल मीडिया सलाहकार अमरजीत सिंह, प्रवक्ता सुजाता पॉल, डॉ0 प्रतिमा सिंह, पूर्व सैनिक विभाग अध्यक्ष रामरतन नेगी, अभिनव थापर आदि उपस्थित थे।

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