देहरादून। ब्राह्मण महासभा के तत्वावधान में नव संवत के पावन पर्व पर एक भव्य धार्मिक समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर महासभा के सभी पदाधिकारियों एवं ब्राह्मण बंधुओं ने एकत्र होकर सनातन परंपरा के अनुसार विधि-विधान पूर्वक पंचांग पूजन और हवन यज्ञ किया।
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत रूप से पंडित शशि वल्लभ शास्त्री के सान्निध्य में हुई। उन्होंने चिरंजीव भगवान परशुराम जी का सर्वप्रथम तिलक किया और उनके चरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात पंचांग की विशेष पूजा की गई। पूजन के बाद आयोजित हवन यज्ञ में पंडित शास्त्री ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि आज से नव संवत का प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज और सनातन संस्कृति के अनुयायियों को नव संवत को ही प्रमुखता देनी चाहिए, क्योंकि यही हमारी सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। मनमोहन शर्मा ने कहा कि नव संवत का यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है। उन्होंने पंचांग पूजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज इस तरह के आयोजनों से समाज में जागृति लाने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति की असली पहचान नव संवत से ही जागृत होती है, इसलिए हमें इसे सर्वश्रेष्ठ मानना चाहिए।”
वहीं लालचंद शर्मा ने जोरदार अपील करते हुए कहा कि हम सभी को नव संवत को हर्षोल्लास से मनाना चाहिए और अंग्रेजी कैलेंडर का बहिष्कार करना चाहिए। उन्होंने ब्राह्मण महासभा के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक अनुष्ठान (पंचांग पूजन व हवन) जनमानस में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता पैदा करते हैं और यह अत्यंत प्रशंसनीय है।
इस आयोजन में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शामिल होने वालों में लालचंद शर्मा,मनमोहन शर्मा, उमाशंकर शर्मा, पंडित शशि बल्लभ शास्त्री, सुरेंद्र अग्रवाल, सीताराम नौटियाल, मनोज शर्मा, पीयूष गोड, महेश कोठारी, जी.आर. नौटियाल, कल्याण चक्रवर्ती, अतुल शर्मा, दिनेश शर्मा, विजय मंगाई, डॉ. शैलेंद्र कौशिक,डॉ वी डी शर्मा,सुनील अग्रवाल और शंकर मनी सेमवाल का नाम प्रमुख रहा।

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