विकट संकष्टी चतुर्थी: संकटों का नाश करने वाला पावन व्रत

5 अप्रैल को होगी वैशाख संकष्टी चतुर्थी का व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित है, जो विघ्नहर्ता और संकटमोचन के रूप में पूजे जाते हैं। इस वर्ष वैशाख मास की विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल 2026, रविवार को मनाई जाएगी।

चतुर्थी तिथि 5 अप्रैल 2026 को सुबह लगभग 11:59 बजे शुरू होकर 6 अप्रैल को दोपहर लगभग 2:10 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि और चंद्रोदय के अनुसार व्रत 5 अप्रैल रविवार को ही रखा जाएगा। चंद्रोदय का समय लगभग रात 9:29 से 9:58 बजे के आसपास रहेगा (स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकता है)। व्रत पारण चंद्रमा के दर्शन के बाद किया जाता है।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व

‘संकष्टी’ शब्द ‘संकट’ और ‘कष्ट’ से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है संकटों और कठिनाइयों का नाश। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना और व्रत से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं, बाधाएं मिटती हैं और मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

वैशाख मास की यह संकष्टी विशेष रूप से विकट संकष्टी के नाम से जानी जाती है। इसमें गणेश जी के विकट (दुष्ट या कठिन) रूप की उपासना की जाती है, जो जीवन की विकट परिस्थितियों को आसान बनाने में सहायक मानी जाती है। भक्त इस दिन गणेश जी से बुद्धि, सिद्धि और समृद्धि की कामना करते हैं। कई कथाओं में वर्णित है कि गणेश पूजा से संकटों का निवारण होता है और माता पार्वती की ममता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

व्रत और पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन फलाहार या केवल जल ग्रहण कर सकते हैं। शाम को गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है।

मुख्य पूजा सामग्री:

  • लाल या पीले वस्त्र
  • दूर्वा घास
  • मोदक, लड्डू, गुड़
  • चंदन, फूल, अगरबत्ती
  • गणेश चालीसा, अथर्वशीर्ष या संकटनाशन गणेश स्तोत्र

सरल पूजा विधि:

  1. सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं।
  3. दूर्वा, फूल और मोदक अर्पित करें।
  4. गणेश मंत्र जपें: “ॐ गं गणपतये नमः” या “ॐ विकटाय नमः”
  5. संकष्टी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
  6. चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।

इस दिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यता

संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है, आर्थिक संकट दूर होते हैं और संतान सुख की प्राप्ति होती है। जो भक्त नियमित रूप से हर महीने यह व्रत रखते हैं, उन्हें गणेश जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

विशेष अनुरोध: स्थानीय पंचांग या मंदिर के अनुसार चंद्रोदय समय की पुष्टि अवश्य करें, क्योंकि थोड़ी भिन्नता हो सकती है।

इस पावन अवसर पर सभी भक्तों से प्रार्थना है कि वे भगवान गणेश की कृपा से अपने जीवन के सभी विघ्नों को दूर करें और सुखमय जीवन व्यतीत करें।

ॐ गं गणपतये नमः
हर हर महादेव! गणेश भगवान की जय!

अस्वीकरण (Disclaimer)
इस लेख/सामग्री में दी गई सूचना, तथ्य और विचारों की सटीकता, संपूर्णता, या उपयोगिता के लिए [merouttrakhand.in] किसी भी प्रकार से उत्तरदायी या जिम्मेदार नहीं है। यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है और इसे किसी भी पेशेवर सलाह (जैसे धार्मिक, कानूनी, वित्तीय, चिकित्सा, आदि) का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। पाठक इन जानकारियों के आधार पर कोई भी कदम उठाने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें या किसी विशेषज्ञ से सलाह लें।

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